‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ को बताया ऐतिहासिक, क्या बदलेगी महिलाओं की भूमिका?

देहरादून। महिला सशक्तिकरण को लेकर उत्तराखंड में एक अहम पहल सामने आई है। राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष कुसुम कंडवाल ने शनिवार को सचिवालय स्थित मीडिया सेंटर में आयोजित प्रेसवार्ता में “नारी शक्ति वंदन अधिनियम 2023” को ऐतिहासिक कदम बताया।

उन्होंने कहा कि यह अधिनियम भारत के लोकतांत्रिक इतिहास का एक महत्वपूर्ण अध्याय है, जो देश की करोड़ों महिलाओं की आकांक्षाओं को साकार करता है। कुसुम कंडवाल ने इसे सामाजिक और राजनीतिक परिवर्तन का प्रतीक बताते हुए कहा कि आज “नारी शक्ति” केवल एक विचार नहीं रह गई है, बल्कि देश के विकास की सबसे बड़ी ताकत बनकर उभर रही है।

उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व की सराहना करते हुए कहा कि उनके दूरदर्शी निर्णयों के कारण महिलाओं को अब केवल योजनाओं की लाभार्थी नहीं, बल्कि नीति निर्माण में भागीदारी का अवसर मिल रहा है। यह बदलाव देश की प्रगति के लिए बेहद जरूरी है।

कुसुम कंडवाल ने कहा कि भारत का समग्र विकास तभी संभव है, जब महिलाओं को बराबरी का अधिकार और नेतृत्व का अवसर मिले। “महिला नेतृत्व वाला विकास” ही देश को नई ऊंचाइयों तक ले जा सकता है और यह अधिनियम उसी दिशा में एक मजबूत कदम है।

उन्होंने यह भी कहा कि इस कानून के माध्यम से महिलाओं को राजनीतिक प्रतिनिधित्व में अधिक अवसर मिलेंगे, जिससे निर्णय लेने की प्रक्रिया में उनकी भागीदारी बढ़ेगी। इससे समाज में समानता, न्याय और सशक्तिकरण को बढ़ावा मिलेगा।

प्रेसवार्ता के दौरान उन्होंने महिलाओं से आगे बढ़कर अपने अधिकारों के प्रति जागरूक होने और समाज के हर क्षेत्र में सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान भी किया।

 

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