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200 साल की हिंदी पत्रकारिता पर मंथन: फेक न्यूज और एआई युग में कैसे बचेगी विश्वसनीयता?

डॉ. श्रीगोपाल नारसन एडवोकेट  हिंदी पत्रकारिता के द्विशताब्दी वर्ष के अवसर पर आयोजित एक विशेष समारोह में पत्रकारिता की ऐतिहासिक यात्रा, वर्तमान चुनौतियों और भविष्य की दिशा पर व्यापक चर्चा की गई। यह आयोजन माधवराव सप्रे स्मृति समाचार पत्र संग्रहालय एवं शोध संस्थान में संपन्न हुआ, जिसमें देशभर के वरिष्ठ पत्रकारों, शिक्षाविदों और मीडिया विशेषज्ञों ने भाग लिया।

कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में संबोधित करते हुए मध्यप्रदेश के राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने कहा कि दो सौ वर्ष पहले शुरू हुई हिंदी पत्रकारिता ने स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान जनचेतना जगाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। आज जब फेक न्यूज और भ्रामक सूचनाओं का दौर है, तब पत्रकारों की जिम्मेदारी और भी बढ़ जाती है कि वे समाज के सामने तथ्यपरक और विश्वसनीय जानकारी प्रस्तुत करें।

बरकतउल्ला विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. एस.के. जैन ने अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में कहा कि पहले पत्रकारिता समाज को दिशा देने का माध्यम थी, लेकिन समय के साथ उसकी मूल भावना प्रभावित हुई है। वहीं माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता विश्वविद्यालय के कुलगुरु विजयमनोहर तिवारी ने कहा कि हिंदी के पहले समाचार पत्र ‘उदन्त मार्तंड’ का उद्देश्य ही भारतीयों के हित की रक्षा करना था, लेकिन वर्तमान समय में मीडिया इस मूल मंत्र से भटकता दिखाई दे रहा है।

कार्यक्रम के दौरान वरिष्ठ पत्रकारों ने एआई और सोशल मीडिया के बढ़ते प्रभाव पर चिंता जताई। चंडीगढ़ से आए वरिष्ठ पत्रकार अरुण नैथानी ने कहा कि सोशल मीडिया के कारण सूचना का वातावरण भ्रमित हो गया है, जिससे पत्रकारिता की विश्वसनीयता पर प्रश्नचिह्न लग रहा है। उन्होंने इस माध्यम के लिए स्पष्ट आचार संहिता बनाने की आवश्यकता पर बल दिया।

इस अवसर पर विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट योगदान देने वाले पत्रकारों को सम्मानित भी किया गया। लोकमत के वरिष्ठ संपादक विकास मिश्र को माधवराव सप्रे सम्मान, दैनिक ट्रिब्यून के अरुण नैथानी को महेश गुप्ता सृजन सम्मान तथा ब्रजेश शर्मा को आंचलिक पत्रकारिता के लिए राज्य स्तरीय पुरस्कार प्रदान किया गया।

कार्यक्रम में वक्ताओं ने इस बात पर जोर दिया कि पत्रकारिता के इतिहास, मूल्यों और आदर्शों को नई पीढ़ी तक पहुंचाना समय की आवश्यकता है, ताकि आने वाले वर्षों में पत्रकारिता अपनी विश्वसनीयता और सामाजिक दायित्व को कायम रख सके।

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