चारधाम से सामाजिक न्याय तक—कैसे बदली धामी के नेतृत्व में उत्तराखंड की तस्वीर?

देहरादून। उत्तराखंड सरकार के चार वर्ष पूर्ण होने पर श्री बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति (बीकेटीसी) के अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व को ऐतिहासिक बताते हुए इसे प्रदेश के विकास का स्वर्णिम काल कहा है। उन्होंने कहा कि “चार साल बेमिसाल” कार्यक्रमों के माध्यम से प्रदेशभर में जनभागीदारी के साथ सरकार की उपलब्धियों का उत्सव मनाया जा रहा है, जिससे जनता में उत्साह और भरोसा दोनों दिखाई दे रहे हैं।

हेमंत द्विवेदी ने कहा कि मुख्यमंत्री धामी ने “मुख्य सेवक” की भावना के साथ कार्य करते हुए राज्य को नई दिशा दी है। उनके कार्यकाल में विकास के कई नए प्रतिमान स्थापित हुए हैं, जिनका प्रभाव प्रदेश की अर्थव्यवस्था, सामाजिक संरचना और प्रशासनिक व्यवस्था में स्पष्ट रूप से देखा जा सकता है।

उन्होंने विशेष रूप से चारधाम यात्रा के सफल संचालन का उल्लेख करते हुए कहा कि पिछले वर्षों में यात्रा प्रबंधन, सुरक्षा और सुविधाओं में उल्लेखनीय सुधार हुआ है। इससे न केवल श्रद्धालुओं की संख्या में वृद्धि हुई है, बल्कि पर्यटन और स्थानीय रोजगार को भी बड़ा लाभ मिला है।

द्विवेदी ने कहा कि उत्तराखंड ने देश में सबसे पहले समान नागरिक संहिता (यूसीसी) लागू कर ऐतिहासिक पहल की है, जिसने सामाजिक समानता और न्याय की दिशा में नया अध्याय जोड़ा है। इसके साथ ही राज्य सरकार द्वारा लागू किया गया सख्त नकल विरोधी कानून शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता और विश्वसनीयता स्थापित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित हुआ है। उन्होंने कहा कि इस कानून से युवाओं का भविष्य सुरक्षित हुआ है और प्रतियोगी परीक्षाओं में ईमानदारी को बढ़ावा मिला है।

महिला सशक्तिकरण के क्षेत्र में भी सरकार की पहल को सराहते हुए द्विवेदी ने कहा कि राज्य में सरकारी नौकरियों में महिलाओं को 30 प्रतिशत क्षैतिज आरक्षण प्रदान करना एक दूरदर्शी निर्णय है। इससे महिलाओं की भागीदारी और आत्मनिर्भरता को नई मजबूती मिली है।

उन्होंने विश्वास जताया कि मुख्यमंत्री धामी के नेतृत्व में उत्तराखंड आगे भी विकास, सुशासन और सामाजिक समरसता के मार्ग पर निरंतर प्रगति करता रहेगा।

 

 

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