भराड़ीसैंण (गैरसैंण)। उत्तराखंड विधानसभा का बजट सत्र पांच दिन की तीखी कार्यवाही और हंगामों के बाद अनिश्चितकाल के लिए स्थगित हो गया। इस दौरान सरकार ने वित्तीय वर्ष 2026-27 का इतिहास का सबसे बड़ा बजट (1,11,703 करोड़ रुपये) सदन में सफलतापूर्वक पारित कराया, लेकिन रसोई गैस (एलपीजी) की किल्लत, कालाबाजारी, बढ़ती कीमतों और आपूर्ति व्यवस्था को लेकर सत्ता पक्ष व विपक्ष के बीच जमकर बहस हुई।
सत्र के दौरान शिक्षा, स्वास्थ्य, पर्यटन, हरित ऊर्जा और ग्रामीण विकास जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा हुई, लेकिन रसोई गैस संकट मुख्य विवाद का केंद्र बना रहा। विपक्षी कांग्रेस ने सदन में और बाहर जोरदार विरोध दर्ज कराया। कांग्रेस विधायकों और कार्यकर्ताओं ने आरोप लगाया कि प्रदेश के कई हिस्सों में घरेलू व व्यावसायिक गैस सिलेंडरों की भारी कमी है, कालाबाजारी और जमाखोरी चल रही है, जिससे आम जनता, होटल, ढाबा संचालक और छोटे व्यापारी बुरी तरह प्रभावित हैं। उन्होंने सरकार पर महंगाई नियंत्रण में नाकामी और वैश्विक परिस्थितियों (मध्य पूर्व संघर्ष) का हवाला देकर समस्या से पल्ला झाड़ने का आरोप लगाया।
कांग्रेस ने गैरसैंण में विधानसभा परिसर के बाहर भी प्रदर्शन किया। पार्टी कार्यकर्ताओं ने गैस सिलेंडरों के कटआउट लेकर नारेबाजी की, धरना दिया और सरकार के खिलाफ जोरदार विरोध जताया। सदन के अंदर भी इस मुद्दे पर हंगामा चरम पर रहा। विधानसभा अध्यक्ष ऋतु खंडूड़ी भूषण ने एलपीजी की कालाबाजारी और जमाखोरी पर सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए तथा प्रशासन को अलर्ट रहने को कहा।
वहीं सरकार की ओर से मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी और मंत्रियों ने सदन में स्पष्ट किया कि घरेलू गैस की आपूर्ति में कोई कमी नहीं है। वैश्विक चुनौतियों के बावजूद राज्य सरकार स्थिति पर पैनी नजर रखे हुए है और सुचारु व्यवस्था बनाए रखने के लिए लगातार प्रयासरत है। उन्होंने कालाबाजारी रोकने के लिए सख्त कदम उठाने का आश्वासन दिया तथा इसे मुख्य रूप से केंद्रीय विषय बताया।
पांच दिनों के इस बजट सत्र में बजट पारित होने के अलावा विभिन्न विभागीय मुद्दों पर विस्तृत चर्चा हुई, लेकिन गैस संकट ने पूरे सत्र को प्रभावित किया। अंत में सभी निर्धारित कार्यवाही पूरी होने के बाद विधानसभा अध्यक्ष ने सत्र को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित घोषित कर दिया।