शीतकालीन पर्यटन और नए डेस्टिनेशन से बदलेगी उत्तराखंड की आर्थिकी

डॉ. रवि शरण दीक्षित

देवभूमि के नाम से प्रसिद्ध उत्तराखंड अपनी अद्भुत प्राकृतिक सुंदरता, धार्मिक आस्था और सरल जीवनशैली के कारण भारत ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया में विशेष पहचान रखता है। हिमालय की गोद में बसे इस राज्य के पर्वत, नदियां, झीलें, मंदिर और सांस्कृतिक परंपराएं पर्यटकों को अपनी ओर आकर्षित करती हैं। यही कारण है कि पर्यटन यहां की अर्थव्यवस्था को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।

पर्यटन केवल घूमने-फिरने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह आर्थिक विकास, सांस्कृतिक आदान-प्रदान और स्थानीय रोजगार के अवसरों का बड़ा माध्यम भी है। जब पर्यटक किसी क्षेत्र में आते हैं तो वहां के होटल, रेस्टोरेंट, परिवहन और स्थानीय व्यवसायों को भी बढ़ावा मिलता है। इसके साथ ही पर्यटन पर्यावरण संरक्षण और सांस्कृतिक विरासत को सुरक्षित रखने की आवश्यकता को भी रेखांकित करता है।

भारत जैसे विविधताओं से भरे देश में पर्यटन प्राकृतिक सौंदर्य, ऐतिहासिक धरोहर और समृद्ध संस्कृति को जानने का अवसर प्रदान करता है। इस संदर्भ में उत्तराखंड का महत्व लगातार बढ़ रहा है। राज्य गठन के समय वर्ष 2000 में यहां होटलों की संख्या लगभग 4803 थी, जो अब बढ़कर सरकारी आंकड़ों के अनुसार 10509 तक पहुंच गई है। इसी तरह होम स्टे की संख्या भी तेजी से बढ़ी है। पिछले पांच वर्षों में यह संख्या 3955 से बढ़कर लगभग 6161 हो गई है।

पर्यटकों की संख्या में भी उल्लेखनीय वृद्धि देखी गई है। वर्ष 2000 में जहां घरेलू पर्यटकों की संख्या करीब एक करोड़ थी, वहीं अब यह आंकड़ा लगभग 6 करोड़ तक पहुंच चुका है। विदेशी पर्यटकों की संख्या भी लगभग 54 हजार से बढ़कर करीब दो लाख हो गई है। इसके अलावा चारधाम यात्रा में भी हर साल बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंच रहे हैं। पिछले वर्ष चारधाम यात्रा में लगभग 56 लाख श्रद्धालुओं ने दर्शन किए।

राज्य सरकार पर्यटन को वर्षभर सक्रिय बनाए रखने के लिए शीतकालीन पर्यटन को भी बढ़ावा दे रही है। इसके साथ ही प्रत्येक जिले में नए पर्यटन स्थलों को विकसित करने पर भी काम किया जा रहा है। धार्मिक पर्यटन के साथ-साथ साहसिक पर्यटन भी तेजी से लोकप्रिय हो रहा है। टिहरी झील अब एडवेंचर और वाटर स्पोर्ट्स के लिए एक नए केंद्र के रूप में विकसित हो रही है।

उत्तराखंड में कई ऐसे स्थल हैं जिनमें पर्यटन की अपार संभावनाएं हैं। इनमें स्थानीय सांस्कृतिक मेले, देवताओं की प्राचीन पूजा परंपराएं, आसन बैराज, हिमालय दर्शन, देवप्रयाग में गंगा संगम, देहरादून का झंडा मेला जैसे आकर्षण शामिल हैं। यदि इन स्थलों पर बेहतर सुविधाएं विकसित की जाएं और उन्हें सड़क, रेल और हवाई मार्ग से सीधे जोड़ा जाए तो यहां पर्यटन को और अधिक गति मिल सकती है।

पर्यटन के समग्र विकास के लिए बुनियादी सुविधाओं का मजबूत होना बेहद जरूरी है। बेहतर सड़कें, ठहरने की सुविधाएं, स्वच्छता और सुरक्षित परिवहन व्यवस्था पर्यटकों के अनुभव को बेहतर बनाती हैं। साथ ही यह क्षेत्र युवाओं के लिए भी रोजगार और उद्यमिता के नए अवसर खोल सकता है।

भविष्य में हेलीकॉप्टर सेवा के माध्यम से भी पर्यटन को नया आयाम दिया जा सकता है। यदि प्रदेश के किसी चिन्हित स्थान से 6 से 8 घंटे की हेलीकॉप्टर पर्यटन यात्रा शुरू की जाए तो यह देश-विदेश के पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र बन सकती है।

स्पष्ट है कि प्राकृतिक सौंदर्य, धार्मिक आस्था और सांस्कृतिक धरोहर से समृद्ध उत्तराखंड में पर्यटन की अपार संभावनाएं मौजूद हैं। यदि योजनाबद्ध तरीके से इस क्षेत्र का विकास किया जाए तो यह न केवल राज्य की अर्थव्यवस्था को सशक्त करेगा बल्कि स्थानीय संस्कृति और विरासत को सुरक्षित रखने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

 

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