देहरादून।
मुख्यमंत्री **श्री पुष्कर सिंह धामी** ने उत्तराखंड में कानून व्यवस्था, प्रशासनिक कार्यशैली और जनसेवा को लेकर सख्त निर्देश जारी किए हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी और सभी विभागों को आम जनता के प्रति संवेदनशील, उत्तरदायी और परिणामोन्मुखी दृष्टिकोण अपनाने का आदेश दिया।
सचिवालय में आयोजित उच्चस्तरीय बैठक में मुख्यमंत्री ने **अखिल भारतीय डीजी/आईजी सम्मेलन** से प्राप्त निष्कर्षों की समीक्षा करते हुए राज्य की कानून व्यवस्था, प्रशासनिक कार्यप्रणाली, सुरक्षा व्यवस्था, पर्यटन प्रबंधन, राजस्व, नशा मुक्ति, अभियोजन, कारागार सुधार एवं जनशिकायत निवारण से जुड़े सभी मुद्दों पर विस्तृत चर्चा की। इस बैठक में मुख्य सचिव सहित सभी जिलाधिकारी, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक और प्रशासनिक अधिकारी उपस्थित रहे।
मुख्यमंत्री ने कहा कि **दिल्ली–देहरादून एक्सप्रेसवे** के खुलने के बाद राज्य में पर्यटकों की संख्या में वृद्धि होगी, इसलिए **होटल, आवास, पार्किंग, ट्रैफिक प्लान और सुरक्षा व्यवस्था** को समयबद्ध रूप से सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने **कैंची धाम बाईपास** को जून तक पूरा करने के निर्देश दिए, ताकि श्रद्धालुओं और पर्यटकों को सुविधा मिल सके।
पुलिस व्यवस्था पर सख्त रुख अपनाते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि **थाना चौकिया और धरातल पर वर्क कल्चर में सुधार** लाया जाए। आम नागरिकों के साथ मानवीयता और सम्मानजनक व्यवहार सुनिश्चित किया जाए और निर्दोष लोगों को परेशान करने वाली किसी भी शिकायत को गंभीरता से लिया जाए।
मुख्यमंत्री ने **भूमि से जुड़े अपराधों (लैंड फ्रॉड)** में संलिप्त लोगों के खिलाफ कठोर कानून बनाने और उन्हें किसी भी स्थिति में बख्शा न जाने के निर्देश दिए। साथ ही सभी प्रशासनिक विभागों के बीच **प्रभावी समन्वय** स्थापित करने की आवश्यकता बताई।
राजस्व व्यवस्थाओं की समीक्षा करते हुए उन्होंने वैकल्पिक राजस्व स्रोत बढ़ाने, सब्सिडी योजनाओं के आउटकम का मूल्यांकन करने और मामलों में देरी न होने के निर्देश दिए।
इसके अलावा मुख्यमंत्री ने **नशा मुक्ति अभियान** को जन आंदोलन के रूप में संचालित करने, **अभियोजन अधिकारियों का परफॉर्मेंस ऑडिट**, **कारागार विभाग में बंदियों के लिए स्किल डेवलपमेंट और पुनर्वास योजनाओं** को प्रभावी बनाने के निर्देश दिए।
सीएम धामी ने सभी जिलों में **जनशिकायत निवारण को सर्वोच्च प्राथमिकता** देने, योजनाओं के धरातलीय क्रियान्वयन और नियमित भौतिक सत्यापन पर विशेष ध्यान देने की हिदायत दी। उन्होंने यह स्पष्ट किया कि राज्य में शांति भंग करने वालों के खिलाफ **सख्त से सख्त कार्रवाई** की जाएगी और कानून व्यवस्था से किसी भी प्रकार का समझौता स्वीकार्य नहीं है।