देहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में संचालित “जन-जन की सरकार, जन-जन के द्वार” कार्यक्रम प्रदेश में सुशासन को सीधे जनता तक पहुँचाने का एक सफल मॉडल साबित हो रहा है। इस पहल के माध्यम से सरकार जनता के द्वार पर जाकर उनकी समस्याओं का त्वरित समाधान सुनिश्चित कर रही है, जिससे आम नागरिकों में प्रशासनिक विश्वास और बढ़ा है।
आज कुल **7 कैम्पों** का आयोजन किया गया, जिसमें **2,933 नागरिकों** ने प्रत्यक्ष रूप से भाग लिया और विभिन्न विभागों से जुड़ी समस्याओं का समाधान प्राप्त किया। इन कैम्पों में नागरिकों को **राजस्व, सामाजिक कल्याण, स्वास्थ्य, शिक्षा, रोजगार, पेंशन, प्रमाण पत्र और शिकायत निस्तारण** जैसी सेवाएं एक ही मंच पर उपलब्ध कराई गईं।
कार्यक्रम की शुरुआत से अब तक प्रदेशभर में कुल **452 कैम्प आयोजित किए जा चुके हैं**, जिसमें **3,56,992 से अधिक नागरिकों** ने प्रत्यक्ष रूप से सहभागिता की है। यह आंकड़ा इस बात का प्रमाण है कि जनता इस पहल पर पूर्ण विश्वास कर रही है और सरकार की जन-केंद्रित नीतियों को सराह रही है।
मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि इस कार्यक्रम का उद्देश्य केवल योजनाएं बनाना नहीं है, बल्कि यह सुनिश्चित करना है कि उनका लाभ **अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे।** उन्होंने स्पष्ट किया कि “जन-जन की सरकार, जन-जन के द्वार” के माध्यम से शासन और जनता के बीच की दूरी समाप्त हुई है और नागरिकों को सरकारी सेवाओं का त्वरित लाभ मिल रहा है।
इस पहल से न केवल प्रशासनिक पारदर्शिता मजबूत हुई है, बल्कि आम नागरिकों का सरकार पर विश्वास भी और अधिक गहरा हुआ है। प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों से मिली सकारात्मक प्रतिक्रिया मुख्यमंत्री के **जवाबदेह, संवेदनशील और जन-केंद्रित शासन मॉडल** को उजागर करती है।
सरकार इस कार्यक्रम के माध्यम से यह सुनिश्चित कर रही है कि प्रदेश की हर योजना और सुविधा सीधे जनता तक पहुंचे, जिससे उत्तराखंड में सुशासन और लोकतांत्रिक सहभागिता को और मजबूती मिले।