लावारिस शवों का अंतिम संस्कार करने वाली शालू सैनी को कल्किधाम पीठाधीश्वर का नमन, आचार्य प्रमोद कृष्णम ने की खुलकर सराहना

रुड़की।समाज सेवा और मानवता के प्रति समर्पण की मिसाल बन चुकीं क्रांतिकारी शालू सैनी को कल्किधाम पीठाधीश्वर आचार्य प्रमोद कृष्णम जी महाराज ने सम्मानित कर नमन किया। लावारिस शवों के अंतिम संस्कार जैसी संवेदनशील और कठिन सेवा में निरंतर जुटी शालू सैनी के कार्यों की आचार्य प्रमोद कृष्णम जी ने मुक्तकंठ से सराहना की।

इस अवसर पर आचार्य प्रमोद कृष्णम जी महाराज ने कहा कि शालू सैनी द्वारा की जा रही सेवाएं अतुलनीय हैं और उन्हें केवल स्थानीय नहीं, बल्कि वैश्विक स्तर पर सहयोग मिलना चाहिए। उन्होंने कहा कि यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि इतनी बड़ी सेवा के बावजूद शालू सैनी को अपेक्षित समर्थन नहीं मिल पा रहा। उन्होंने उन्हें महिलाओं के लिए प्रेरणा स्रोत बताते हुए कहा कि उनके कार्य समाज में सकारात्मक परिवर्तन की दिशा तय कर रहे हैं।

सम्मान समारोह में शालू सैनी ने भावुक संबोधन में कहा कि वे समाज से सहयोग मांगकर ही अपनी सेवाएं करती हैं। उन्होंने महिलाओं से आह्वान किया कि वे स्वयं को किसी भी परिस्थिति में कमजोर न समझें। उन्होंने कहा, “जो अपनी हार पहले ही मान लेता है, उसे जीत का आनंद नहीं मिल सकता।” शालू सैनी ने महिलाओं को आत्मरक्षा के लिए तैयार होने की आवश्यकता पर भी बल दिया।

उन्होंने बताया कि वे एक सिंगल मदर हैं और बच्चों की जिम्मेदारियों को निभाने के साथ-साथ समाज सेवा में भी पूरी निष्ठा से जुटी हुई हैं। लावारिस शवों के अंतिम संस्कार के लिए वे हर समय तत्पर रहती हैं और सीमित संसाधनों के बावजूद अपने कर्तव्यों को पूरी ईमानदारी से निभा रही हैं।

आचार्य प्रमोद कृष्णम जी महाराज ने शालू सैनी के जज्बे और समर्पण को सलाम करते हुए कहा कि ऐसे लोग ही समाज की सच्ची धरोहर होते हैं।

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