मध्य प्रदेश ने वर्ष 2025 में वन्यजीव संरक्षण के क्षेत्र में एक और ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की है। राज्य के शिवपुरी जिले में स्थित माधव नेशनल पार्क को आधिकारिक रूप से टाइगर रिजर्व का दर्जा मिल गया है। इसके साथ ही मध्य प्रदेश में टाइगर रिजर्व की संख्या बढ़कर नौ हो गई है, जिससे यह राज्य एक बार फिर देश में “टाइगर स्टेट” के रूप में अपनी मजबूत पहचान को और सुदृढ़ करता नजर आ रहा है।
मार्च 2025 में भारत सरकार द्वारा इसे देश का 58वां और मध्य प्रदेश का नौवां टाइगर रिजर्व घोषित किया गया। चंबल अंचल में स्थित यह क्षेत्र लंबे समय से अपनी समृद्ध जैव विविधता, घास के मैदानों, जलाशयों और मिश्रित वनों के लिए जाना जाता रहा है। अब टाइगर रिजर्व बनने के बाद यह इलाका बाघ संरक्षण और पुनर्वास का एक महत्वपूर्ण केंद्र बनकर उभरा है।
माधव टाइगर रिजर्व का कुल क्षेत्रफल लगभग 375 वर्ग किलोमीटर है, जिसमें कोर और बफर जोन शामिल हैं। विशेषज्ञों के अनुसार यह क्षेत्र उत्तर और मध्य भारत के वन्यजीव गलियारों को जोड़ने में अहम भूमिका निभाएगा। इससे न केवल बाघों की संख्या बढ़ेगी, बल्कि उनकी आनुवंशिक विविधता भी सुरक्षित रहेगी।
टाइगर रिजर्व घोषित होने के बाद यहां चरणबद्ध तरीके से बाघों का पुनर्वास शुरू किया गया है। शुरुआती चरण में अन्य अभयारण्यों से लाए गए बाघों ने इस क्षेत्र में खुद को अनुकूलित करना शुरू कर दिया है। बाघों के साथ-साथ यहां तेंदुआ, भालू, सांभर, चीतल, नीलगाय और कई दुर्लभ पक्षी प्रजातियां भी पाई जाती हैं।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि माधव टाइगर रिजर्व मध्य प्रदेश की वन नीति और संरक्षण प्रयासों की बड़ी सफलता है। इससे न केवल जैव विविधता को मजबूती मिलेगी, बल्कि पर्यटन और स्थानीय रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे। वहीं केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने इसे ग्वालियर-चंबल क्षेत्र के लिए ऐतिहासिक उपलब्धि बताया।
कुल मिलाकर, माधव टाइगर रिजर्व मध्य प्रदेश को न सिर्फ “टाइगर स्टेट” बल्कि “टाइगर संरक्षण मॉडल स्टेट” के रूप में स्थापित करने की दिशा में एक मजबूत कदम साबित हो रहा है।