जुबिन गर्ग की मौत: एक महीने बाद भी न्याय की आस अधर में

सत्यनारायण मिश्र, वरिष्ठ पत्रकार

गुवाहाटी। असम के सांस्कृतिक धरोहर, गायक-संगीतकार जुबिन गर्ग की रहस्यमयी मौत को आज ठीक एक महीना हो गया। 19 सितंबर को सिंगापुर में एक कॉन्सर्ट से ठीक पहले समुद्र में तैरते हुए उनकी डूबने से मौत हो गई। आधिकारिक रूप से इसे हादसा बताया गया, लेकिन उनके प्रशंसकों, परिवार और असम की जनता के दिल में सवालों का तूफान आज भी बरकरार है। गिरफ्तारियां हुईं, विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन हुआ, दावे किए गए निष्पक्ष जांच के, लेकिन एक महीने बाद भी सच्चाई की कोई झलक दिखाई नहीं दी। क्या यह वाकई हादसा था, या पैसे, साजिश और लापरवाही का काला खेल? उपलब्ध आंकड़ों और घटनाक्रम के आधार पर यह रिपोर्ट उन सवालों को उजागर करती है जो असम को झकझोर रहे हैं।

जुबिन गर्ग: असम की आवाज़, जो कभी खामोश न होने वाली थी। जुबिन न सिर्फ एक गायक थे, बल्कि असमीया संस्कृति के प्रतीक थे। बॉलीवुड में ‘या अली’ (‘गैंगस्टर’) से धमाल मचाने वाले इस कलाकार ने असमीया, बंगाली, हिंदी और अंग्रेजी में सैकड़ों गीत दिए। वे अभिनेता, कवि, निर्देशक भी थे। 1992 में युवा महोत्सव में स्वर्ण पदक जीतने के बाद उन्होंने ‘अनामिका’ एल्बम से पेशेवर सफर शुरू किया। उनकी बहन जोंगकी बरठाकुर की 2002 में कार हादसे में मौत ने उन्हें तोड़ा, लेकिन उन्होंने ‘शिशु’ एल्बम से श्रद्धांजलि दी। जुबिन की आखिरी इच्छा थी कि उनकी मौत पर ‘मायाबिनी रातिर बुकुत’ गीत बजे – जो आज असम के हर घर में ‘श्रद्धांजलि गान’ बन चुका है।19 सितंबर 2025 को, सिंगापुर में नॉर्थ ईस्ट इंडिया फेस्टिवल (19-21 सितंबर) के लिए गए, जुबिन स्कूबा डाइविंग के दौरान लापता हो गए। अस्पताल पहुंचने पर डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। सिंगापुर पुलिस ने प्रारंभिक पोस्टमॉर्टम में ‘डूबना’ कारण बताया, लेकिन असम में 60 से ज्यादा एफआईआर दर्ज हो चुकी हैं – लापरवाही, सुरक्षा की कमी और संदिग्ध साजिश के आरोपों पर एसआईटी गठित हुई। यह टीम 60 एफआईआर की जांच कर रही है। लेकिन उपलब्ध आंकड़ों से साफ है कि गिरफ्तारियां तो हुईं, पर सच्चाई उजागर करने में देरी हो रही है।

नीचे गिरफ्तारियों का क्रमबद्ध विवरण:
तारीख
आरोपी का नाम
पद/संबंध
आरोप/कारण
25 सितंबर
शेखर ज्योति गोस्वामी
बैंड मेंबर (ड्रमर)
विवादित यॉट ट्रिप, जहर देने का दावा। पुलिस हिरासत में भेजा गया।

1 अक्टूबर
श्यामकानु महंत
इवेंट आयोजक
लापरवाही, सुरक्षा की कमी, जहर साजिश। दिल्ली से गिरफ्तार।

1 अक्टूबर
सिद्धार्थ शर्मा
मैनेजर
जहर देने का आरोप, लापरवाही। गुरुग्राम से पकड़ा गया।

3 अक्टूबर
अमृतप्रभा महंत
बैंड मेंबर (गायिका)
साजिश में सहयोग। CID पूछताछ।

7 अक्टूबर
दो पर्सनल सिक्योरिटी ऑफिसर
सुरक्षा गार्ड
बैंक खातों में ₹1 करोड़ संदिग्ध ट्रांजेक्शन। मनी ट्रेल जांच।

15 अक्टूबर
पांच आरोपी (कुल)
विभिन्न
न्यायिक हिरासत में। जेल भेजने पर बक्सा जेल के बाहर हिंसा, 9 गिरफ्तार।

कुल सात मुख्य गिरफ्तारियां, लेकिन बैंड ड्रमर शेखर का दावा सबसे चौंकाने वाला: “जुबिन को सिंगापुर में मैनेजर और आयोजक ने जहर दिया, मौत को हादसा दिखाने की साजिश।”

गरिमा ने पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट पुलिस को लौटा दी, कहते हुए – “यह निजी दस्तावेज नहीं, जांचकर्ता तय करें।”

मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने सीबीआई जांच का दरवाजा खोला, लेकिन विपक्ष (कांग्रेस) इसे ‘दिखावा’ बता रहा।

जांच का स्टेटस: तेजी के दावे, लेकिन लंबी प्रतीक्षा
एसआईटी ने 25 सितंबर को आयोजक और मैनेजर के घर छापे मारे।

16 अक्टूबर को सीएम ने घोषणा की – “20 अक्टूबर को एसआईटी सिंगापुर जाएगी, नवंबर तक चार्जशीट।”

लेकिन सिंगापुर पुलिस का 17 अक्टूबर का बयान हताशाजनक:
“प्रारंभिक जांच में कोई साजिश या अपराध का संदेह नहीं। पूरी जांच में 3 महीने लगेंगे।”

सिंगापुर पुलिस ने ऑटोप्सी रिपोर्ट भारत को सौंप दी, लेकिन कोरोनर जांच (Coroners Act 2010) के निष्कर्ष जनवरी 2026 तक आ सकते हैं। असम में विसरा रिपोर्ट से ‘निश्चित आधार’ मिला, लेकिन विवरण गोपनीय।

X (पूर्व ट्विटर) पर सर्च से साफ है – जनता गुस्से में। राहुल गांधी ने 17 अक्टूबर को गुवाहाटी पहुंचकर श्रद्धांजलि दी, कंचनजंगा पर्वत पर खड़े होकर कहा, “जुबिन अडिग और ईमानदार थे। सिंगापुर घटना की पारदर्शी जांच हो।”

कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने निष्पक्ष जांच की मांग की। विपक्षी नेता गौरव गोगोई ने आरोप लगाया, “हत्या का केस है, लेकिन पुलिस मुख्य आरोपियों पर ठोस जांच नहीं कर रही।” 18 अक्टूबर को एडिटेड वीडियो फैलाने के आरोप में एक व्यक्ति गिरफ्तार।
एक महीने का दर्द: क्या हासिल हुआ?
सकारात्मक: एसआईटी गठन, 7 गिरफ्तारियां, सिंगापुर यात्रा, विसरा रिपोर्ट।
नकारात्मक: कोई ठोस निष्कर्ष नहीं, सिंगापुर जांच में देरी, हिंसा (बाक्सा जेल पर पथराव, 9 गिरफ्तार),

अफवाहें (X पर कई सारी पोस्ट्स में साजिश के दावे)।

जनता की पुकार: असम में विरोध प्रदर्शन, ब्रह्मपुत्र घाटी फिल्म महोत्सव स्थगित। गरिमा ने कहा, “एजेंसियों पर भरोसा है, लेकिन जवाब चाहिए।”

जुबिन की मौत असम के लिए सिर्फ एक व्यक्तिगत क्षति नहीं, बल्कि सांस्कृतिक संकट है। एक महीना बीत गया, गिरफ्तारियां हुईं, लेकिन न्याय? वह अभी भी जांच के गलियारों और सिंगापुर की फाइलों में कैद है। क्या नवंबर तक चार्जशीट आएगी, या यह रहस्य और गहरा जाएगा? असम की जनता इंतजार कर रही है।

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