डीमापुर-कोहिमा हेलिकॉप्टर सेवा: सड़कों की बदहाली का अनोखा हल

सत्यनारायण मिश्र, वरिष्ठ पत्रकार
दीमापुर(नगालैंड)
नगालैंड के परिवहन विभाग ने खराब सड़कों का ऐसा विकल्प निकाला है, जो शायद ही और कहीं देखने को मिले! राज्य की खस्ताहाल सड़कों का दर्द काफी पुराना है। उदाहरण के लिये दीमापुर से कोहिमा का 74 किलोमीटर का रास्ता, जो सड़क ठीक होने की हालत में ढाई घंटे में तय हो सकता था, अब गड्ढों, कीचड़ और भूस्खलन की वजह से थकाऊ और जोखिम भरा हो गया है। बारिश का मौसम आते ही यह सफर और मुश्किल हो जाता है। मरीजों को अस्पताल पहुंचाने से लेकर रोजमर्रा की यात्रा तक, हर कदम पर मुसीबत। लेकिन अब, नगालैंड के परिवहन विभाग ने एक चौंकाने वाला कदम उठाया है—सड़क ठीक नहीं हो पा रही, इसलिये दीमापुर और कोहिमा के बीच दैनिक हेलिकॉप्टर सेवा शुरू कर दी है! सड़क से नहीं जा पा रहे तो उड़न खटोले से जाइये!

सप्ताह में पांच दिन (सोमवार से शुक्रवार) चलने वाली यह हेलिकॉप्टर सेवा सक्षम यात्रियों के लिए एक नई उम्मीद लेकर आई है। चाहे कोहिमा में पढ़ने वाले छात्र हों, दीमापुर के व्यापारी हों, या सरकारी काम से आने-जाने वाले कर्मचारी, यह सेवा समय और थकान बचाने का वादा करती है। परिवहन विभाग का कहना है कि यह अस्थायी व्यवस्था है, जब तक सड़कों की मरम्मत नहीं हो जाती।

लेकिन क्या यह सेवा वाकई राहत देगी, या यह सरकारी नाकामी को छिपाने का एक महंगा ढोंग है?

सड़कों की कड़वी सच्चाई:
दीमापुर, नगालैंड का व्यापारिक दिल, और कोहिमा, इसकी प्रशासनिक धड़कन, दोनों को जोड़ने वाली सड़कें लंबे समय से बदहाल हैं। भूस्खलनों और रखरखाव के अभाव जैसे कारणों से गड्ढों से भरी ये सड़कें न केवल यात्रियों की कमर तोड़ती हैं, बल्कि गाड़ियों की मरम्मत का खर्चा भी जेब पर भारी पड़ता है। बारिश में तो हालात ऐसे हो गये हैं कि कई सड़कें दलदल और तालाब में बदल गई हैं। मरीजों को समय पर अस्पताल पहुंचाना तक दूभर हो गया है। लोगों के लिये दीमापुर से कोहिमा जाना जंग लड़ने जैसा है। सड़कें इतनी खराब हैं कि गाड़ी बार-बार खराब होती है। हेलिकॉप्टर सुनने में तो अच्छा है, लेकिन क्या आम लोग इसे रोज़ अफोर्ड कर पायेंगे?

सपना या दिखावा?
हेलिकॉप्टर सेवा की घोषणा ने कुछ उम्मीदें तो जगाई हैं। कोहिमा में पढ़ने वाली एक छात्रा कहती है, “हर हफ्ते दीमापुर घर जाना पड़ता है। बस का सफर थका देता है। अगर हेलिकॉप्टर किफायती हो, तो यह मेरे जैसे कई लोगों के लिए वरदान होगा।”

लेकिन कई लोग इसे सरकारी नाकामी का प्रतीक मानते हैं। सवाल उठाते हैं, “सड़कें ठीक करने का पैसा नहीं, लेकिन हेलिकॉप्टर उड़ाने का बजट कहां से आ गया? यह आम आदमी की सुविधा कम, दिखावा ज्यादा लगता है।” सवाल यही है—क्या यह सेवा आम नागरिकों की जेब के हिसाब से होगी, या सिर्फ अमीरों और अधिकारियों के लिए एक नया खिलौना बनेगी?

हेलिकॉप्टर सेवा निस्संदेह एक अनोखा कदम है, लेकिन यह सड़कों की जमीनी हकीकत को नहीं बदल सकता। नगालैंड जैसे पहाड़ी राज्य में सड़कें बनाना और उनकी देखभाल करना चुनौतीपूर्ण है, लेकिन असंभव नहीं। लेकिन नगालैंड की जनता को आज भी एक ऐसी सड़क का इंतज़ार है—जो सुरक्षित हो, सुगम हो, और उनकी मेहनत की कमाई बचाये।

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