राजस्थान के चित्तौड़गढ़ जिले में मंगलवार देर रात एक दर्दनाक हादसा हुआ, जिसने पूरे क्षेत्र को दहला दिया। राशमी थाना क्षेत्र के सोमी-उपरेडा मार्ग पर एक वैन, गूगल मैप के सहारे रास्ता तलाशते हुए तीन साल से बंद पड़ी पुलिया पर पहुंच गई। पुलिया पर तेज पानी का बहाव होने के बावजूद चालक ने वैन उतार दी, जिससे वाहन बीच में फंस गया और फिर बनास नदी के तेज बहाव में बह गया। वैन में कुल नौ लोग सवार थे, जिनमें से पांच को ग्रामीणों और पुलिस ने बचा लिया, जबकि चार की तलाश अब भी जारी है।
परिवार के साथ हुआ हादसा
पुलिस के अनुसार, सभी यात्री चित्तौड़गढ़ जिले के भूपालसागर थाना क्षेत्र के कानाखेड़ा गांव के रहने वाले गाडरी समाज के सदस्य हैं। मंगलवार सुबह यह परिवार सवाईभोज और देमाली दर्शन के लिए भीलवाड़ा गया था। दर्शन के बाद शाम को वे एक रिश्तेदार के घर रुके, जहां खाने के बाद रिश्तेदारों ने देर रात सफर न करने की सलाह दी। हालांकि, परिवार की एक सदस्य ने देवता के कारण बताते हुए रात रुकने से मना कर दिया और सभी अपने घर की ओर रवाना हो गए।
यात्रा के दौरान इन्होंने गूगल मैप की सहायता से रास्ता चुना। पहले तो वे सांखली मार्ग से पुलिया पर पहुंचे, लेकिन वहां प्रशासन ने जेसीबी लगाकर रास्ता बंद किया हुआ था। इसके बाद गूगल मैप ने उन्हें सोमी-उपरेडा पुलिया से ले जाने का मार्ग दिखाया, जो तीन साल से बंद थी। इसी पुलिया पर हादसा हुआ।
तेज बहाव में बही वैन
बनास नदी पर स्थित पुलिया पर पहले से पानी बह रहा था और बीच में एक बड़ा गड्ढा भी था। जैसे ही वैन वहां पहुंची, वह फंस गई और धीरे-धीरे पानी के तेज बहाव में बह गई। वैन में फंसे लोगों ने किसी तरह शोर मचाकर मदद मांगी। सूचना पर ग्रामीण बड़ी संख्या में मौके पर पहुंचे। पुलिस व प्रशासन को भी जानकारी दी गई। नाव मंगवाकर मदनलाल (25), हितेश (16), लीला (18), काव्यांश (9 माह) और आयांश (9 माह) को सुरक्षित निकाल लिया गया।
हालांकि, चंदा (21), ममता (25), खुशी (4) और रूत्वी (6) पानी में बह गए। अंधेरा होने के कारण तत्काल रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू नहीं हो सका। देर रात करीब 3:15 बजे सिविल डिफेंस की टीम मौके पर पहुंची और बुधवार सुबह से लापता लोगों की तलाश तेज कर दी गई।
प्रशासन की चेतावनी के बावजूद हादसा
हादसे से ठीक पहले प्रशासन ने मातृकुंडिया बांध में पानी की आवक बढ़ने के कारण अलर्ट जारी किया था। मंगलवार रात 10 बजे बांध के गेट खोले गए और सायरन भी बजाया गया था। साथ ही नदी पर बने निचले पुलों के रास्ते जेसीबी और पत्थरों से बंद कर दिए गए थे। लेकिन परिवार को यह जानकारी नहीं थी क्योंकि वे लंबे समय बाद गांव आए थे।
रिश्तेदारों ने किया था मना
हादसे से बचाए गए हितेश ने बताया कि रिश्तेदारों ने उन्हें रात को सफर न करने और वहीं रुकने की सलाह दी थी। लेकिन परिवार की एक भाभी ने देवता का हवाला देकर यात्रा जारी रखने पर जोर दिया। यदि उस समय वे रुक जाते तो यह दर्दनाक हादसा शायद टल सकता था।
फिलहाल चार लोगों की तलाश जारी है। मौके पर पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी मौजूद हैं। ग्रामीण भी रेस्क्यू में मदद कर रहे हैं।