डेढ़ करोड़ का घोटाला या किसानों का हक? कांग्रेस ने सरकार को घेरा

प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना में हुए डेढ़ करोड़ से अधिक के घोटाले ने एक बार फिर सरकार और विभागीय अधिकारियों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। उत्तराखंड कांग्रेस की मुख्य प्रवक्ता गरिमा मेहरा दसौनी ने शनिवार को प्रदेश कांग्रेस मुख्यालय में पत्रकार वार्ता कर भाजपा सरकार और कृषि विभाग पर भ्रष्टाचार को संरक्षण देने का आरोप लगाया।

गरिमा ने कहा कि तत्कालीन जिलाधिकारी देहरादून सोनिका सिंह की जांच रिपोर्ट में यह साफ हो चुका है कि रायपुर में तैनात कृषि एवं भूमि संरक्षण अधिकारी राजदेव पवार ने फर्जी लाभार्थियों के नाम पर करोड़ों रुपये का गबन किया था। इस मामले में संयुक्त कृषि निदेशक दिनेश कुमार ने भी 25 किसानों के बयान दर्ज किए थे और जांच में घोटाले की पुष्टि हुई थी। योजना के अंतर्गत 200 किसानों को लाभ पहुंचाने का दावा किया गया था, लेकिन 175 किसानों को लेकर जांच अधूरी छोड़ दी गई।

कांग्रेस प्रवक्ता ने हैरानी जताई कि इतने ठोस सबूतों के बावजूद कृषि विभाग ने हाल ही में आरोपी अधिकारी को क्लीन चिट दे दी। उन्होंने सवाल उठाया कि अगर वह अधिकारी दोषी नहीं है, तो डेढ़ करोड़ रुपये आखिर गए कहां? सरकारी खजाने से निकला पैसा किसकी जेब में पहुंचा?

गरिमा ने भाजपा सरकार पर सीधा हमला बोलते हुए कहा कि यह सिर्फ एक अधिकारी का भ्रष्टाचार नहीं है, बल्कि सत्ता के संरक्षण में किया गया संगठित घोटाला है। उन्होंने कहा कि किसानों और ग्रामीणों की मेहनत की कमाई को लूटने का काम किया गया है, जबकि सरकार भ्रष्ट अधिकारियों को बचाने में लगी है।

दसौनी ने मांग की कि इस पूरे मामले की उच्च स्तरीय स्वतंत्र जांच कराई जाए और दोषियों के खिलाफ आर्थिक अपराध का मुकदमा दर्ज हो। उन्होंने यह भी कहा कि भ्रष्ट अधिकारियों की संपत्ति जब्त कर किसानों का हक लौटाया जाए।

कांग्रेस प्रवक्ता ने कहा कि भाजपा सरकार के शासनकाल में योजनाओं का पैसा लगातार भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ रहा है और किसान आज भी सिंचाई जैसी बुनियादी सुविधाओं से वंचित हैं। उन्होंने सरकार को चेतावनी दी कि यदि किसानों के हक की अनदेखी जारी रही, तो कांग्रेस सड़कों पर उतरकर व्यापक आंदोलन करेगी।

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