भराड़ीसैंण। उत्तराखण्ड की ग्रीष्मकालीन राजधानी गैरसैंण में विधान सभा सत्र के दौरान ठहरने की व्यवस्थाओं को लेकर बड़ा सवाल खड़ा हो गया है। सचिवालय सेवा संवर्ग के नोडल अधिकारियों—जिनमें कई महिला अधिकारी भी शामिल हैं—के लिए उचित ठहरने की व्यवस्था न होना गंभीर विषय के रूप में सामने आया है।
जहां बड़े अधिकारी और राजनीतिक प्रतिनिधि सभी प्रकार की सुविधाओं से युक्त आवास में ठहरे हुए हैं, वहीं दूसरी ओर निचले स्तर पर कार्य करने वाले नोडल अधिकारियों को उचित कमरे तक उपलब्ध नहीं कराए गए। बताया जा रहा है कि जिला प्रशासन ने उन्हें ऐसे हालात में छोड़ दिया मानो वे “भेड़-बकरियों की तरह” इधर-उधर समायोजित किए जा रहे हों।
अधिकारियों के लिए शर्मनाक हालात
सूत्रों के अनुसार, सचिवालय प्रशासन और विधानसभा से उचित आवास उपलब्ध कराए जाने के बजाय नोडल अधिकारियों को जिला प्रशासन के हवाले छोड़ दिया गया। परिणामस्वरूप कई अधिकारी बिना कमरे के सड़कों और वाहनों में रात बिताने को मजबूर हो गए। यह स्थिति विशेष रूप से महिला अधिकारियों के लिए असुरक्षा और असुविधा का कारण बन रही है।
बड़ी सुविधाएं सिर्फ उच्चाधिकारियों तक सीमित
स्थानीय लोगों और कर्मचारियों ने इस व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए कहा कि गैरसैंण को ग्रीष्मकालीन राजधानी घोषित किए जाने के बावजूद यहां ठहरने की पर्याप्त और समुचित सुविधाओं का अभाव है। बड़े अधिकारियों और नेताओं को आलीशान कमरे और सभी संसाधन उपलब्ध कराए जाते हैं, जबकि वास्तविक कामकाज संभालने वाले निचले अधिकारियों के लिए हालात बेहद खराब हैं।
जिम्मेदारों से हस्तक्षेप की मांग
इस मुद्दे पर कर्मचारी संगठनों और कई अधिकारियों ने नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि मुख्य सचिव, सचिव सचिवालय प्रशासन और सचिव विधानसभा को इस समस्या का तुरंत संज्ञान लेना चाहिए। उन्होंने मांग की कि उच्च अधिकारियों की “गणेश परिक्रमा” से ध्यान हटाकर, निचले स्तर पर कार्यरत कार्मिकों के लिए भी पर्याप्त कमरे और सुरक्षित ठहरने की व्यवस्थाएं सुनिश्चित की जाएं।
गैरसैंण की छवि पर सवाल
विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की व्यवस्थाओं की कमी गैरसैंण की छवि को धूमिल करती है। जब राजधानी के रूप में इसे स्थापित किया गया था, तो उम्मीद थी कि यहां बुनियादी सुविधाओं का विकास होगा। लेकिन बार-बार ऐसे हालात सामने आना प्रशासनिक लापरवाही को उजागर करते हैं।
क्या होगी अगली कार्यवाही?
अब देखना यह होगा कि राज्य सरकार और प्रशासन इस गंभीर समस्या पर कितना संवेदनशील रुख अपनाते हैं। यदि समय रहते आवासीय व्यवस्थाओं को दुरुस्त नहीं किया गया, तो आने वाले दिनों में गैरसैंण में आयोजित होने वाले विधानसभा सत्र और अन्य कार्यक्रमों में भी ऐसी असुविधाएं अधिकारियों और कर्मचारियों के मनोबल को प्रभावित कर सकती हैं।