नगालैंड की 70% से ज़्यादा आबादी ग्रामीण क्षेत्रों में निवास करती है, इसलिए नियोजित ग्रामीण परिवर्तन अत्यंत महत्वपूर्ण है। यह कार्यक्रम विद्यार्थियों को ग्रामीण अर्थव्यवस्था, शासन, सामाजिक गतिशीलता और प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन की गहन समझ प्रदान करता है। आवेदन करने की अंतिम तिथि 20 जुलाई 2025 है।
लुमामी (नगालैंड)। राज्य का एकमात्र केंद्रीय विश्वविद्यालय, नगालैंड विश्वविद्यालय, ग्रामीण विकास और प्रबंधन में एक नया स्नातकोत्तर (एमए) कार्यक्रम शुरू कर रहा है, जिसका उद्देश्य पेशेवरों का एक कैडर तैयार करना है। ये पेशेवर ग्रामीण क्षेत्रों, विशेष रूप से नगालैंड और पूर्वोत्तर क्षेत्र में ग्रामीण विकास के मामलों में सामने आने वाली चुनौतियों और अवसरों का सामना करने के लिए सक्षम होंगे।
नगालैंड विश्वविद्यालय के कुलपति, प्रो. जगदीश के. पटनायक ने यह जाकारी देते हुए बताया कि इस कार्यक्रम के स्नातकों के पास संबंधित क्षेत्रों के अलावा सरकारी, गैर-सरकारी संगठनों (एनजीओ), शिक्षा जगत और उद्यमिता में मज़बूत करियर के रास्ते होंगे।
उन्होंने कहा कि नगालैंड की 70% से ज़्यादा आबादी ग्रामीण क्षेत्रों में निवास करती है, इसलिए नियोजित ग्रामीण परिवर्तन का बहुत अधिक महत्व है। ये नए कार्यक्रम छात्रों को ग्रामीण अर्थव्यवस्था, शासन, सामाजिक गतिशीलता, प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन और विकास योजनाओं के नियोजन एवं क्रियान्वयन की गहन समझ प्रदान करेंगे।
ग्रामीण विकास एवं नियोजन विभाग के अंतर्गत शुरू किए जा रहे इस कार्यक्रम को नगालैंड विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. जगदीश के. पटनायक की अध्यक्षता में हुई 40वीं शैक्षणिक परिषद की बैठक में मंजूरी दी गई। इसमें 20 छात्र प्रवेश ले सकेंगे।
आवेदन 20 जुलाई 2025 तक खुले रहेंगे। गैर-सीयूईटी उम्मीदवारों के लिए प्रवेश परीक्षा (पीजी) 28 जुलाई 2025 को आयोजित की जाएगी। इच्छुक उम्मीदवार अधिक जानकारी www.nagalanduniversity.ac.in से प्राप्त कर सकते हैं।
राज्य के विकास के लिए ऐसे कार्यक्रमों की आवश्यकता पर विस्तार से प्रकाश डालते हुए नगालैंड विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. जगदीश के. पटनायक ने कहा, “यह कार्यक्रम शैक्षणिक उत्कृष्टता को बढ़ावा देने और ग्रामीण एवं आदिवासी समुदायों की महत्वपूर्ण विकासात्मक आवश्यकताओं को पूरा करने की हमारी प्रतिबद्धता की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। सिद्धांत को व्यावहारिक जुड़ाव के साथ एकीकृत करके, यह पाठ्यक्रम पेशेवरों और परिवर्तनकर्ताओं का एक समर्पित कैडर तैयार करने के लिए डिज़ाइन किया गया है जो नागालैंड और उसके बाहर ग्रामीण विकास, शासन और सतत आजीविका पहलों में सार्थक योगदान दे सकें।” प्रो. पटनायक ने इस नई पहल से जुड़े संकाय सदस्यों, विद्यार्थियों और सभी हितधारकों को अपनी शुभकामनाएं दीं।
इसके अलावा नगालैंड विश्वविद्यालय के ग्रामीण विकास एवं नियोजन विभाग के प्रमुख प्रो. जयंत चौधरी ने कहा, “यह कार्यक्रम ग्रामीण विकास में स्थानीय नेतृत्व और कुशल पेशेवरों के निर्माण की दिशा में एक रणनीतिक कदम है। यह न केवल शैक्षणिक और रोज़गार की संभावनाओं को बढ़ाता है, बल्कि युवा मस्तिष्कों को अपने समुदायों के लिए परिवर्तनकारी बनने में भी सक्षम बनाता है।”
प्रो. जयंत चौधरी ने विभाग की सहायक प्रोफेसर डॉ. दीपा थंग्जाम, डॉ. मेरेन्संगला लोंग्कुमेर और डॉ. गुणेशोरी मैसनम के योगदान की भी सराहना की।
प्रो. दीपक सिन्हा, प्रो-वाइस चांसलर, मेडज़िफेमा कैंपस, नगालैंड विश्वविद्यालय ने कार्यक्रम के सफल संचालन के लिए हर संभव सहयोग का आश्वासन दिया। प्रो. बी. किलांग्ला जमीर, डीन, सामाजिक विज्ञान संकाय, नागालैंड विश्वविद्यालय ने इस नए पाठ्यक्रम के शुभारंभ पर ग्रामीण विकास एवं नियोजन विभाग को बधाई दी।
पात्रता
न्यूनतम 50% अंकों के साथ बी.ए., बी.एससी., बी.कॉम., बीबीए (भाषा विषयों को छोड़कर) में स्नातक स्नातकोत्तर कार्यक्रम के लिए पात्र हैं। अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति/अन्य पिछड़ा वर्ग/दिव्यांग उम्मीदवारों के लिए छूट प्रदान की जाती है। नगालैंड विश्वविद्यालय से संबद्ध कॉलेजों के छात्रों को 10% बोनस वेटेज दिया जाता है।