अमेरिकी विशेषज्ञ दल शिवसागर पहुंचा, दो प्लान फेल होने के बाद तीसरे प्लान के तहत ONGC कुएं में गैस रिसाव रोकने की कवायद शुरू
सत्यनारायण मिश्र
शिवसागर (असम)।
असम के शिवसागर जिले में ऑयल एंड नेचुरल गैस कॉरपोरेशन (ONGC) के RDS-147A कुएं से हो रहे गैस रिसाव को नियंत्रित करने के लिए अमेरिका से तीन सदस्यीय विशेषज्ञ दल शिवसागर पहुंच गया है। यह कुआं भाटियापार के बारीचुक क्षेत्र में रुद्रसागर तेल क्षेत्र में स्थित है, जहां 12 जून से अनियंत्रित गैस रिसाव के कारण पर्यावरणीय जोखिम और स्थानीय लोगों में दहशत का माहौल है।
विशेषज्ञ दल का मिशन
अमेरिकी कुआं नियंत्रण विशेषज्ञों- केनेथ राइट, रॉबर्ट मेलानकॉन, और विलियम मैकडोनाल्ड- ने यहां पहुंचते ही मौके पर जाकर स्थिति का जायजा लिया और फिर उच्च जोखिम वाले कैंपिंग आपरेशन की शुरुआत कर दी। इस ऑपरेशन को पूरा होने में 4 से 5 दिन लग सकते हैं। ओएनजीसी के एक वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक अमेरिकी विशेषज्ञ दल को ताजा अभियान शुरू करने के पहले अपनी ओर से किए गए तमाम प्रयासों की डिटेल जानकारी दी गई।
स्थिति की गंभीरता
12 जून को हुए विस्फोट के बाद से कुएं से लगातार गैस रिसाव हो रहा है, जिसके कारण आसपास के 1,500 से अधिक लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया। स्थानीय प्रशासन ने 70 परिवारों को बोंगांव हाई स्कूल में राहत शिविरों में स्थानांतरित किया है, जहां भोजन, पेयजल, और चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। गैस की तेज गंध और शोर के कारण स्थानीय निवासियों में स्वास्थ्य समस्याएं और भय बढ़ रहा है।
ONGC ने पहले दो आपातकालीन योजनाएं (प्लान A और B) लागू कीं, जो असफल रहीं। अब तीसरी योजना (प्लान C) के तहत कुएं को स्थायी रूप से सील करने का निर्णय लिया गया है। केंद्रीय पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने ऑपरेशन की समीक्षा की और केंद्र व राज्य सरकार स्थिति पर 24/7 नजर रख रही हैं। ONGC की संकट प्रबंधन टीम (CMT) और भारतीय इंजीनियर अमेरिकी विशेषज्ञों के साथ मिलकर काम कर रहे हैं।
अधिक चिंता की बात यह भी है कि यह कुआं नदी के तटबंध के पास स्थित है, जिससे बाढ़ की स्थिति में खतरा और बढ़ सकता है। इसलिए, कैपिंग ऑपरेशन को समयबद्ध तरीके से पूरा करना प्राथमिकता है। ONGC ने वायु गुणवत्ता की निगरानी और जल-कंबल संचालन जैसे सुरक्षा उपायों को लागू किया है।
यह ऑपरेशन न केवल तकनीकी रूप से जटिल है, बल्कि स्थानीय समुदाय की सुरक्षा और पर्यावरण संरक्षण के लिए भी महत्वपूर्ण है। सभी की निगाहें अब इस मिशन की सफलता पर टिकी हैं।