डॉ श्रीगोपाल नारसन एडवोकेट
सुनीता विलियम्स अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा के माध्यम से अंतरिक्ष में जाने वाली भारतीय मूल की दूसरी महिला है।सुनीता गुजरात के अहमदाबाद से सम्बंध रखती है। एक महिला अंतरिक्ष यात्री के रूप में सुनीता विलियम्स ने 127 दिनों तक अंतरिक्ष में रहने का विश्व कीर्तिमान स्थापित किया है। इनके पिता दीपक पाण्डया अमेरिका में एक चिकित्सक थे। जिनकी मृत्यु सन 2020 में हो गई थी।सुनीता विलियम्स और बुच विल्मोर 9 महीने 14 दिन तक अंतरिक्ष मे रहने के बाद पृथ्वी पर वापस आए हैं। इनके साथ क्रू-9 के दो और एस्ट्रोनॉट अमेरिका के निक हेग और रूस के अलेक्सांद्र गोरबुनोव भी रहे हैं। सुनीता विलियम्स का ड्रैगन स्पेसक्राफ्ट भारतीय समयानुसार 19 मार्च को सुबह 3:27 बजे फ्लोरिडा के तट पर लैंड हुआ,तो खुशी के मारे सब उछल पड़े।
ये चारों अंतरिक्ष यात्री एस्ट्रोनॉट से इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन से रवाना 18 मार्च को रवाना हुए थे। स्पेसक्राफ्ट के धरती के वायुमंडल में प्रवेश करने पर इसका तापमान 1650 डिग्री सेल्सियस से ज्यादा हो गया था। इस दौरान करीब 7 मिनट तक कम्युनिकेशन ब्लैकआउट रहा यानी यान से संपर्क कटा रहा।
ड्रैगन कैप्सूल के अलग होने से लेकर समुद्र में लैंडिंग तक उन्हें करीब 17 घंटे का समय लगा। 18 मार्च को सुबह 08:35 बजे स्पेसक्राफ्ट का दरवाजा यात्रियों के यान में बैठ जाने के बाद बंद हुआ था। 19 मार्च की रात 2:41 बजे डीऑर्बिट बर्न शुरू हुआ। यानी, कक्षा से उल्टी दिशा में स्पेसक्राफ्ट का इंजन फायर किया गया। इससे स्पेसक्राफ्ट की पृथ्वी के वातावरण में एंट्री हुई और सुबह 3:27 बजे फ्लोरिडा के तट पर पानी में उसकी लैंडिंग हुई।अंतरिक्ष में लंबे समय तक रहने से मानव शरीर को कई तरह से प्रभाव पड़ते है। शरीर की हड्डियों और मांसपेशियों में नुकसान, रक्त संचार में बदलाव, देखने की क्षमता में कमी और त्वचा की संवेदनशीलता प्रभावित होती हैं।
गुरुत्वाकर्षण के प्रतिरोध के बिना, अंतरिक्ष यात्रियों को हर महीने लगभग एक से दो प्रतिशत हड्डियों के घनत्व का नुकसान होता है। साथ ही, मांसपेशियों में भी कमजोरी आती है, खासकर पैरों, धड़ और यहां तक कि हृदय पर ही प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। इन प्रभावों को कम करने के लिए अंतरिक्ष यात्री हर दिन व्यायाम करते हैं। अंतरिक्ष यात्रियों को अपनी ताकत वापस पाने के लिए पृथ्वी पर लौटने के बाद महीनों तक पुनर्वास की आवश्यकता होती है। वहां रहकर चेहरा फूला हुआ और पैर पतले हो जाते हैं। तरल पदार्थ सिर में जमा हो जाते हैं, जिससे अंतरिक्ष यात्रियों को ऐसा महसूस होता है जैसे उन्हें लगातार सर्दी लगी हुई है। रक्त संचार में इन बदलावों से खून के थक्के जमने का खतरा बढ़ जाता है। पृथ्वी पर लौटने पर अंतरिक्ष यात्रियों की बारीकी से निगरानी की जाती हैं। माइक्रो ग्रेविटी त्वचा की संवेदनशीलता को भी बढ़ाती है। त्वचा से कपड़े दूर तैरने के कारण, अंतरिक्ष यात्रियों को त्वचा नरम और अधिक संवेदनशील महसूस होती है। पृथ्वी पर लौटने पर, कुछ अंतरिक्ष यात्रियों ने बताया कि रोजमर्रा के कपड़े उनकी त्वचा पर सैंडपेपर की तरह महसूस होते हैं।लंबी अवधि की अंतरिक्ष यात्रा के प्रमुख जोखिमों में से एक विकिरण का जोखिम भी है। पृथ्वी के सुरक्षात्मक वातावरण और चुंबकीय क्षेत्र के बिना, अंतरिक्ष यात्री उच्च स्तर के कॉस्मिक विकिरण के संपर्क में आते हैं, जिससे उन्हें कैंसर और तंत्रिका संबंधी विकारों के विकसित होने का खतरा बढ़ जाता है।इन सब खतरों से जूझते हुए सुनीता विलियम्स व अन्य अंतरिक्ष यात्रियों को सुरक्षित पृथ्वी पर लौट आना किसी चमत्कार से कम नही है। सुनीता विलियम्स और बुच विलमोर ने 5 जून सन 2024 को परीक्षण यान स्टारलाइनर से आईएसएस के लिए उड़ान भरी थी, वहां आठ दिन गुजारने के बाद उनकी वापसी होनी थी लेकिन यान में ख़राबी के कारण यह यात्रा 9 माह के लिए अटक गई थी।इस देरी को लेकर सभी की सांस अटकी हुई थी।लेकिन सफल वापसी ने फिर से एक नया इतिहास बना दिया है।
(लेखक वरिष्ठ साहित्यकार व आध्यात्मिक चिंतक है)