एम्स ऋषिकेश में नवजात शिशुओं ने दम तोड़ा, व्यवस्था लचर

नयी दिल्ली। एम्स अस्पताल के ’न्यूनेटल इन्टेन्सिव केयर यूनिट’ ( नीकू ) में आईसीयू बेड की स्थिति के बारे में एम्स अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक प्रोफेसर संजीव कुमार मित्तल ने बताया कि पीडियाट्रिक वार्ड के न्यूनेटल इन्टेन्सिव केयर यूनिट में आईसीयू बेड बहुत ही सीमित हैं।

कई बार ऐसी स्थिति भी आ जाती है कि आईसीयू बेड खाली नहीं होने से बच्चे का तत्काल इलाज करना मुश्किल हो जाता है। उन्होंने बताया कि बीते 1 अगस्त की सांय 12 दिन के एक बच्चे को लेकर उसके परिजन एम्स इमरजेंसी में पहुंचे थे।

उस दौरान इमरजेंसी में मौजूद चिकित्सकों ने बच्चे को ऑक्सीजन सपोर्ट में रखकर उसका तत्काल प्राथमिक उपचार शुरू किया लेकिन बच्चे को सामान्य बेड के बजाए पीडियाट्रिक वार्ड इन्सेन्टिव केयर यूनिट में आईसीयू बेड की आवश्यकता थी।

चिकित्सा अधीक्षक ने बताया कि उस समय पीडियाट्रिक वार्ड की इस यूनिट में पहले से ही गंभीर स्थिति वाले कई बच्चे एडमिट थे और कोई भी आईसीयू बेड खाली नहीं था, इसलिए तत्कालिक स्थिति को देखते हुए बच्चे के परिजनों को उपचार हेतु उसे अन्यत्र अस्पताल ले जाना पड़ा।

प्रोफेसर मित्तल ने यह भी बताया कि अस्पताल की इमरजेंसी में प्रत्येक मरीज को देखा जाता है और उसे तत्काल प्राथमिक उपचार दिया जाता है। उन्होंने कहा कि गंभीर स्थिति के मरीजों के लिए संबंधित वार्ड में वेन्टिलेटर बेड की उपलब्धता सुनिश्चित करने के बाद ही भर्ती करने की प्रक्रिया अमल में लाई जाती है।

चिकित्सा अधीक्षक ने जानकारी दी कि राज्य सरकार द्वारा एम्स को 200 एकड़ जमीन उपलब्ध कराने की कार्रवाई गतिमान है। भूमि मिलते ही अस्पताल की सुविधाओं में इजाफा होना स्वभाविक है, जिससे इस प्रकार की समस्याओं का स्वतः ही निराकरण हो जाएगा।

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