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पंचायत और निकाय चुनाव : भाजपा और कांग्रेस प्रतिनिधियों ने झोंकी ताकत

  • इन चुनावों को विस और लोस चुनावों के लिए टिकट वितरण का पैमाना माना जा रहा
  • दोनों पार्टियों ने अपने सांसद-विधायकों को किया मोर्चे पर तैनात

राकेश प्रजापति 

भोपाल। प्रदेश में हो रहे पंचायत और नगरीय निकाय चुनाव को आगामी विधानसभा और लोकसभा चुनावों के लिए टिकट वितरण का पैमाना माना जा रहा है। इसलिए दोनों भाजपा और कांग्रेस के प्रतिनिधियों ने पूरी ताकत झोंक दी है। खास बात यह है कि दोनों पार्टियों ने अपने सांसद-विधायक को मोर्चे पर तैनात कर दिया है।

साथ ही, निर्देशित किया है कि चुनाव में सक्रियता और पार्टी प्रत्याशी की जीत-हार के आधार पर उनका राजनीतिक भविष्य तय किया जाएगा। इसलिए निकाय चुनाव जनप्रतिनिधियों के लिए कसौटी बन गए हैं। इसका असर यह हुआ की विधायक अपने-अपने क्षेत्र में रात-दिन एक कर रहे हैं।
भाजपा और कांग्रेस नगरीय निकाय चुनाव को मिशन 2023 की तरह लड़ रही हैं। दोनों पार्टियों को मालूम है कि निकाय चुनाव के परिणाम से विधानसभा चुनाव का रास्ता निकलेगा। इसलिए मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चैहान, भाजपा प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा ने अपने सांसदों, मंत्रियों और विधायकों को जिम्मेदारी देकर चुनावी मोर्चे पर तैनात कर दिया है।

साथ ही, निर्देश हैं कि पार्टी को जीत के अलावा और कुछ स्वीकार नहीं है। वहीं, कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष कमलनाथ ने भी अपने विधायकों को साफ-साफ शब्दों में कह दिया है कि प्रत्याशी की जीत और क्षेत्र में उनकी सक्रियता पर उनका राजनीतिक भविष्य तय होगा। इसलिए चुनावी मैदान में दोनों पार्टियों की सक्रियता देखी जा रही है।
उधर, कांग्रेस ने भी अपने विधायकों को टारगेट थमा दिया है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कमलनाथ ने साफ-साफ कह दिया है कि चुनाव के आधार पर विधायकों का रिपोर्ट कार्ड तैयार होगा। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कमलनाथ के निर्देश पर मप्र कांग्रेस कमेटी नगरीय निकाय चुनाव से अपने विधायकों के परफॉरमेंस का आडिट करा रही है।

जिसका असर अगले साल होने जा रहे विधानसभा चुनाव के टिकट वितरण पर पड़ेगा। प्रदेश कांग्रेस कमेटी ने अपनी सभी जिला इकाइयों को परिपत्र जारी किया है जिसके जरिए निकाय चुनाव में संबंधित विधायकों को परफॉरमेंस का लेखा जोखा मांगा गया है।

पत्र में विधायकों द्वारा अपने समर्थकों को निकाय चुनाव में दिलाए गए टिकटों की में संख्या, उन्हें चुनाव में मिले वोट, उनकी हार-जीत, पिछले निकाय चुनाव में उन्हीं विधायकों द्वारा दिलाए गए पार्षदों के टिकटों की संख्या, उन्हें मिले वोटों की संख्या आदि को जानकारी मांगी गई है। चुनाव परिणाम आने के बाद जिला इकाइयों से निकायवार जानकारी प्रदेश कांग्रेस कमेटी को भेजी जाएगी।
इस जानकारी के विश्लेषण से पता चलेगा कि विधायकों ने अपने जिन समर्थकों को टिकट दिलाए हैं, उनमें से कितने लोग हारे और कितने जीते। इससे विधायकों की शहरी क्षेत्रों में जनता के बीच पैठ का पता चलेगा।

जिन विधायकों का निकाय चुनाव में अच्छा परफॉरमेंस नहीं रहेगा उन्हें फील्ड में और अधिक मेहनत करने को कहा जाएगा। कांग्रेस के सूत्रों का कहना है कि यदि इसके बाद भी विधायक अपने कामकाज में सुधार नहीं लाते हैं, तो उनका टिकट खतरे में पड़ सकता है।
ज्ञात हो कि हाल में कमलनाथ ने अपने विधायकों का सर्वे कराया था। सर्वे रिपोर्ट के मुताबिक, 88 विधायकों में से 27 विधायकों का कामकाज संतोषजनक नहीं पाया गया। इनमें एक दर्जन पूर्व मंत्री भी शामिल हैं।

कमलनाथ ने इन विधायकों को रिपोर्ट के आधार पर उनकी जमीनी हकीकत बताते हुए उनसे अपने क्षेत्र में सक्रिय होने को कहा है। इसके बाद अधिकतर विधायकों ने क्षेत्र में सक्रियता बढ़ा दी है। नगरीय निकाय चुनाव को अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव के सेमीफाइनल के रूप में देखा जा रहा है।
पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ निकाय चुनाव की अहमियत भली-भांति समझते हैं। यही वजह है कि टिकट वितरण से लेकर चुनाव संबंधी अन्य फैसले वे खुद ले रहे हैं। कमलनाथ अपने विधायकों से कह चुके हैं कि उन्होंने अपने समर्थकों को पार्षद पद का टिकट तो दिला दिया, लेकिन उन्हें जिताने की जिम्मेदारी भी उन्हीं की है।

विधायक क्षेत्र में मेहनत नहीं करते हैं, तो अगले चुनाव में विधायकों का टिकट खतरे में पड़ सकता है। यही वजह है कि अपने समर्थकों को चुनाव जिताने के लिए अधिकतर विधायकों ने पूरी ताकत झोंक रखी है।
मप्र कांग्रेस के वरिष्ठ उपाध्यक्ष एवं संगठन प्रभारी चंद्रप्रभाष शेखर का कहना है कि पीसीसी चीफ कमलनाथ विधायकों को अधिक से अधिक पार्षद जिताने के निर्देश दे चुके हैं उनके निर्देशानुसार जिला कांग्रेस कमेटी यों को परिपत्र भेजे गए हैं।

गौरतलब है कि प्रदेश के 16 नगर निगमों में पिछली बार कांग्रेस का एक भी मेयर प्रत्याशी चुनाव नहीं जीता था। इस बार कांग्रेस ने सभी नगर निगमों में मेयर के पद पर दमदार चेहरे चुनाव मैदान में उतारे हैं। कांग्रेस को उम्मीद है कि उसके कम से कम आधा दर्जन महापौर चुने जाएंगे, जिससे पार्टी कार्यकर्ताओं का उत्साह बढ़ेगा।

भाजपा ने अपने सांसदों और विधायकों को जीत का टारगेट देकर मोर्चे पर तैनात कर दिया है। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान और भाजपा प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा ने सांसद और विधायकों से कहा कि आपको अपना पूरा परफॉर्मेंस देना होगा। प्रदेश में पिछली बार भाजपा ने ही सभी 16 महापौर की सीट पर जीत तय की थी।

इस बार भाजपा के सामने अपने सभी सीटों को दोबारा जीतने की चुनौती है। ऐसे में प्रदेश के कई नगर निगमों में कांग्रेस प्रत्याशियों की स्थिति मजबूत होने का फीडबैक सामने आने के बाद मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चैहान और पार्टी संगठन ने चुनाव में सक्रियता और बढ़ा दी है। इन चुनावों में होने वाली जीत हार आपका भविष्य भी तय करेगी इसलिए घर-घर जनसंपर्क करने जाएं और पार्टी कैंडिडेट के लिए काम करें।

मुख्यमंत्री ने कहा कि चुनाव में जब पार्टी का प्रत्याशी जीतेगा तो वार्ड और शहर में होने वाले आयोजनों में विधायकों और सांसदों की पूछ-परख रहेगी। इसलिए सभी घरों से निकलें और एकजुट होकर पार्टी हित के लिए काम करें।

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