दो-दो लाख लीटर के टैंक में एकत्र होगा चश्मों का पानी

पिथौरागढ़ के दो गांवों से शुरू हुआ प्रयोग ,वर्षाकाल के चश्मों का पानी पीने को होगा उपयोग 

देहरादून। सरकार ने पर्वतीय क्षेत्र में पानी की कमी से निपटने के लिए एक महत्वपूर्ण  योजना पर काम शुरू किया है। इसके तहत बरसात में रिर्चाज होने वाले चश्मों के पानी का संग्रहण करने की योजना बनी है। इन चश्मों के पानी को लाखों लीटर के वाटर टैंक में संग्रहित किया जाएगा और उसके बाद उसे गांवों को सप्लाई किया जाएगा।
पेयजल मंत्री बिशन सिंह चुफाल ने मंगलवार को पेयजल विभाग के अधिकारियों की बैठक में यह निर्देश दिये। चुफाल ने बाद में पत्रकारों को बताया कि उन्होंने पिथौरागढ़ के सोलदेंग व मणमान्य में इसका सफल प्रयोग कर दिया है। सोलदेंग में 2.5 लाख व दो लाख लीटर के दो टैंक बनाकर प्राकृतिक चश्मे का पानी उनमें स्टाक कराया गया है। इन बैंकों से रिहायशी इलाकों को पानी दिया जा रहा है। अगर आबादी ऊपर है तो सोलर पम्पिंग सेट से पानी को अपलिफ्ट किया जाएगा। चुफाल ने कहा कि आमतौर पर पहाड़ के गांवों के आसपास चौमास में बहुत सारे प्राकृतिक चश्मे (पानी के स्रोत) फूट जाते हैं। उन्होंने कहा कि बरसाती जल स्रोत द्वारा टैंक के माध्यम से जल संग्रह कर पेयजल के उपयोग किया जाय। इस सम्बन्ध में उन्होंने जल जीवन मिशन के तहत चलायी जाने वाली योजना के अतिरिक्त  ग्राम पंचायत के माध्यम से पेयजल मद के योजना का उपयोग करने का निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि इस योजना के तहत ग्राम पंचायत के माध्यम से उन क्षेत्रों को चिन्हित कर लिया जाय जहां पेयजल की समस्या है अथवा पानी का स्रोत नहीं है। पंचायत राज विभाग के माध्यम से इस कार्य के लिए लगभग 30 करोड रुपये के बजट का उपयोग किया जायेगा। चुफाल ने कहा कि पहाड़ी क्षेत्र में 08-10 किलों के बीच बहुत से स्थान हैं जहां जल स्रोत नहीं है या पेयजल की समस्या है। ऐसे क्षेत्रों में बरसाती जल स्रोत का उपयोग ढाई लाख लीटर क्षमता वाले टैंक में संग्रह कर साफ सफाई के बाद बरसात के बाद भी पेयजल के लिए उपयोग किया जायेगा। उन्होंने कहा कि बरसाती जल स्रोत का उपयोग परम्परागत रूप में भी किया जाता रहा है। इसकी लागत भी अत्यन्त कम आयेगी। ऐसे क्षेत्रों को भी चिन्हित करने का निर्देश दिया गया है जहां पेयजल की मात्रा कम है। आज की बैठक में सचिव नितेश झा, अपर सचिव पेयजल नितिन भदौरिया, मुख्य महाप्रबंधक जल संस्थान एसके शर्मा, मुख्य अभियंता विजय पाण्डेय सहित अन्य अधिकारी मौजूद थे।

सर्वे पूरी हो चुकी पेयजल योजनाओं की डीपीआर अगस्त तक

पेयजल मंत्री चुफाल ने आज की बैठक के बाद बताया कि सरकार ने गर्मी के मौसम में स्थायी जल स्रोतों की मानीटरिंग कर ली है। 15 मई से 15 जून के बीच यह काम किया गया। उन्होंने बताया कि सर्वे का काम पूरा हो चुकी सभी योजनाओं के लिए डीपीआर बनाने का निर्देश दिया गया है।
मंत्री ने इसी महीने तक सभी डीपीआर शासन को भेजने को कह दिया गया है। उन्होंने बताया कि जल जीवन मिशन की योजनाओं से सम्बन्धित डीपीआर अगस्त माह तक पूर्ण कर लिया जाय और टेण्डर इत्यादि करा कर सितम्बर से कार्य प्रारम्भ करा दिया जाय। उन्होंने स्वीकार किया कि हर घर जल, हर घर नल योजना में कई जगह से पानी न आने की शिकायतें आ रही हैं। इसका कारण उन्होंने यह बताया कि पानी की योजनाएं कई साल पहले बन जाती है और जब उसमें काम होता है तो आबादी के लिहाज से पानी कम हो चुका होता है, लेकिन ऐसी सभी योजनाओं को उन्होंने दोबारा योजनाएं बनाकर ठीक करने की बातें कही है।

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