नौकरी से हटाए लोगों को फिर नहीं मिली नियुक्ति

थराली। सतलुज जल विद्युत निगम (एसजेवीएन) ने 12 वर्षों से उपनल से लगे कर्मचारियों को हटाने के कारण युवा सडक़ों पर दर-दर की ठोकर खाने को विवश हो गए हैं। इसके बावजूद अभी तक उनकी पुनर्नियुक्ति नहीं हो पाई है। इसके चलते नौकरी से हटाए गए बेरोजगारों ने आंदोलन की चेतावनी दी है।
पिंडर नदी पर एसजेवीएन द्वारा 172 मेगावाट की जल विद्युत परियोजना का निर्माण किया जाना है। इसके तहत सर्वेक्षण, भूमि हस्तांतरण समेत तमाम कार्यों का संचालन 2005 से हो रहा है।
इसके लिए उपनल के माध्यम से सतलुज कंपनी में स्थानीय युवाओं की उपनल के माध्यम से नियुक्ति की गई है। ज्यादातर युवा 10 से 12 साल तक की सेवा कर चुके हैं। इसी साल एसजेवीएन ने 18 लोगों को हटा दिया। इसके कुछ दिन बाद ही 10 लोगों को फिर नौकरी में ले लिया गया।
अब भी 8 लोग नौकरी के लिए दर-दर भटक रहे हैं। वैसे भी परियोजना के डूब गांव में शामिल सरकोट के सोडिंग गांव निवासी राकेश बिष्ट तथा कैल के खणीगाड़ गांव निवासी सुरेंद्र बिष्ट ने बताया कि मार्च माह में नौकरी से हटाए जाने के बाद अन्य लोगों को तो फिर नौकरी दे दी गई किंतु 3 माह गुजरने के बावजूद उन्हें नौकरी नहीं मिली है।
इसके चलते उनके सामने परिवार के भरण पोषण का संकट पैदा हो गया है। एसजेवीएन के महाप्रबंधक को भेजे पत्र में उन्होने तत्काल नियुक्ति देने की मांग की है। एसजेवीएन प्रबंधक आशुतोष बहुगुणा ने कहा कि जिन लोगों को हटाया गया है वे उपनल के माध्यम से कंपनी में नियुक्त किए गए थे। उपनल के साथ अनुबंध खत्म होने के चलते ही उन्हें हटाया गया। कहा कि परियोजना का निर्माण शुरू  होने पर प्रभावित क्षेत्र ही नहीं अपितु स्थानीय सभी लोगों को रोजगार दिया जाएगा।

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