जंगल ने तुम्हें सलाम भेजा है : मुकेश चंद्राकर के लिए पूनम वासम की चिट्ठी
प्रिय मुकेश,
तुम्हारे रास्ते के सारे फूल मुरझा गए, तुम्हारे हिस्से की सारी नदियां सूख गईं, सारे पहाड़ भरभराकर गिर गए, तुम्हारे हिस्से का सारा दुःख बादल बनकर उड़ गया। सरई के वृक्ष झुककर तुम्हें जोहार कर रहे हैं, चिड़ियों का एक झुंड उड़कर अभी-अभी तुम्हारे घर की मुंडेर पर आया है, उनके हाथों जंगल ने…
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