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कवि प्रधानमंत्री व्यंग्य

अगर कवि बन जाए देश का प्रधानमंत्री, तो कैसी होगी सरकार?

कल्पना कीजिए एक ऐसे देश की, जहां शासन की कमान किसी अनुभवी राजनेता के बजाय एक लोकप्रिय मंचीय कवि के हाथों में हो। जहां संसद की गंभीर बहसें ‘कवि सम्मेलन’ में बदल जाएं और सरकारी फैसले फाइलों में नहीं, बल्कि तुकबंदी में लिखे जाएं। यह व्यंग्यात्मक परिदृश्य भले ही काल्पनिक हो, लेकिन अपने अंदाज में कई गहरे…
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