Browsing Category

आलेख

उत्तरकाशी में स्मृतियों का घर: प्रताप संग्रहालय और एक शिक्षक का संघर्ष

■ उत्तरकाशी में स्मृतियों का घर: प्रताप संग्रहालय और एक शिक्षक का संघर्ष शीशपाल गुसाईं घाट रोड, उत्तरकाशी का वह घर बाहर से किसी आम पहाड़ी मकान जैसा दिखाई देता है—न कोई बड़ी तामझाम, न कोई शोरगुल। लेकिन जैसे ही उसके भीतर पैर पड़ते हैं, समय की दिशा पलट जाती है। बाहर गंगा निरंतर आगे बढ़ रही होती है…
Read More...

ब्रह्माकुमारीज मुख्यालय पर ज्योतिष विद्वानों ने दिखाए अध्यात्म के चमत्कार

डॉ श्रीगोपाल नारसन एडवोकेट प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय के मानसरोवर, माउंट आबू परिसर में 5 दिवसीय अकल्ट परिवार मिलन राजयोग शिविर आयोजित किया गया। जिसके स्वागत सत्र में संस्था महासचिव राजयोगी बीके करुणा भाई ने कहा कि ज्योतिष विद्वानों का परमात्मा के घर आना इस बात का सुखद संकेत…
Read More...

 नहीं रहे महान अकबर और टीपू सुल्तान!

 राजेंद्र शर्मा चलिए, अब ऑफिशियल हो गया। आरएसएस के प्रचार सचिव, आंबेकर साहब ने खुद अपने श्रीमुख से इसका एलान किया है कि अकबर और टीपू सुल्तान अब ‘‘महान’’ नहीं रहे। आजादी के सैकड़ों साल पहले से ये दोनों महान कहलाते आ रहे थे। आजादी के बाद भी पचहत्तर साल तक ये दोनों ही नहीं, वास्तव में और भी बहुत…
Read More...

रिहायशी इलाके में पुलिस कैंप, छीनी जाती ज़मीन : ‘नए भारत’ में आदिवासी अस्तित्व पर गहराता संकट

सिराज दत्ता 15 नवंबर को बिरसा मुंडा की जयंती पर मोदी सरकार ने फिर धूमधाम से ‘जनजाति गौरव दिवस’ मनाया और अपने को आदिवासियों (जिनकी आबादी देश की जनसंख्या का लगभग 9% है) के हितैषी के रूप में पेश किया। वहीं दूसरी ओर, हाल में, सरकार ने लद्दाख के आदिवासियों की संवैधानिक मांग के लोकतांत्रिक संघर्ष को…
Read More...

क्या भारत की अल्पसंख्यक आबादी को हाशिये पर धकेला जा रहा है?

एक ऐसी लंबी श्रृंखला के सवाल—जिनके जवाब देने की हिम्मत कोई नहीं करता (आफरीन हुसैन) जिस दिन यह साफ़ होने लगा कि भारत में अल्पसंख्यकों पर दबाव बढ़ रहा है, उसी दिन एक और बात भी स्पष्ट हो गई एक ऐसा पैटर्न बन रहा है जिसे बहुत से लोग मानने तक को तैयार नहीं। 2014 में नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली…
Read More...

ऋत्विक घटक का फिल्मों की ओर रुख

(आलेख (बांग्ला) : सुब्रत सिन्हा, अंग्रेजी से अनुवाद : मनोज कुलकर्णी) उत्तर-टैगोर दौर में अपने समय के अवांगार्द आधुनिकतावादियों में से एक सुधीन्द्रनाथ दत्ता ने 1928 में अपनी कविता 'एट अ सिनेमा' (एक सिनेमा में) में एक फिल्म देखने के अनुभव को ऐसे दर्ज किया : "शफ्फाक पर्दे पर/ गुजरती है, जीवन की…
Read More...

सिर्फ प्रतीक नहीं, एक जीवंत दर्शन हैं बिरसा मुंडा

बिरसा मुंडा की 150वीं जयंती पर विशेष आलेख : कुमार राणा, अनुवाद : संजय पराते) केवल पच्चीस वर्षों का जीवन, फिर भी उसका फलक काफी व्यापक है। जिस मुंडा समुदाय में उनका जन्म हुआ, जिस भूमि से उनका जुड़ाव रहा और जिन संघर्षों का उन्होंने नेतृत्व किया -- ये सब उनके दायरे को सीमित नहीं कर सके। उनका नाम पूरे…
Read More...

हम हैं मदर ऑफ डेमोक्रेसी!

 राजेंद्र शर्मा यारों, न विरोधी समझे हैं न समझेंगे मोदी जी की बात! बताइए, मोदी जी के विरोधी ब्राजील की मॉडल की हरियाणा की मतदाता सूची में एंट्री तक का स्वागत करने को तैयार नहीं हैं। उल्टे इसके वोट चोरी का सबूत होने का शोर मचा रहे हैं। मोदी जी की इच्छा से ज्ञानेश बाबू अगर मतदाता सूची को…
Read More...

स्थापना दिवस पर: सैन्य इंजीनियरिंग से देश की रक्षा करते है बंगाल सैपर्स !

डा . श्रीगोपालनारसन एडवोकेट जब जब भी देश के बलिदानियों को याद किया जाएगा ,तब तब ही बंगाल सैपर्स का नाम सबसे उपर होगा। क्योकि भारतीय सेना के महत्वपूर्ण सैन्य संगठन बंगाल सैपर्स का बहादुरी में इतिहास रहा है । बंगाल सैपर्स ने राष्टृ पर मर मिटने में कतई कभी कोई कोताही नही की । तभी तो देश पर मर…
Read More...

रावण वध कर जब भगवान राम अयोध्या लौटे तब मनी थी पहली दीपावली!

डॉ श्रीगोपाल नारसन एडवोकेट ,भगवान राम जो तीनों लोकों के स्वामी है उनका घर अयोध्या है या फिर परमधाम,भगवान का घर लौकिक है या अलौकिक!राम चूंकि हम सबके आराध्य है और हमारे देव तथा मर्यादा पुरुषोत्तम है,इसलिए उनका घर सामान्य मनुष्यों की तरह केवल अयोध्या नही हो सकता, वे निश्चित ही परमधाम में वास करते…
Read More...