प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने भारतीय दर्शन और कर्मयोग की भावना को रेखांकित करते हुए प्राचीन संस्कृत मंत्र **“चरैवेति चरैवेति”** का उल्लेख किया और इसे आज के भारत के लिए अत्यंत प्रेरक बताया। उन्होंने कहा कि निरंतर आगे बढ़ते रहने की सोच ही व्यक्ति, समाज और राष्ट्र को प्रगति के शिखर तक पहुंचाती है।
प्रधानमंत्री मोदी ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर लिखा—
“चरैवेति चरैवेति चरन्वै मधु विन्दति। सूर्यास्य पश्य श्रेमाणं न मामार न जीर्यति॥”
उन्होंने इस श्लोक का भावार्थ स्पष्ट करते हुए कहा कि जो व्यक्ति निरंतर परिश्रम करते हुए आगे बढ़ता रहता है, वही सफलता का मधु प्राप्त करता है। सूर्य के समान कर्मशील व्यक्ति कभी थकता नहीं और न ही समय उसे पराजित कर पाता है।
प्रधानमंत्री ने कहा कि यह विचार आज के दौर में और भी अधिक प्रासंगिक हो गया है, जब भारत आत्मनिर्भरता, नवाचार और समग्र विकास के नए संकल्पों के साथ आगे बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि निरंतर प्रयास और सकारात्मक दृष्टिकोण से ही देश वैश्विक मंच पर अपनी मजबूत पहचान बना सकता है।
प्रधानमंत्री मोदी ने विशेष रूप से युवाओं से आह्वान किया कि वे चुनौतियों से घबराने के बजाय उन्हें अवसर के रूप में देखें। सीखने की निरंतर प्रक्रिया, कठिन परिश्रम और आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ने से ही व्यक्तिगत और राष्ट्रीय लक्ष्यों को प्राप्त किया जा सकता है। उनका यह संदेश कर्म, संकल्प और निरंतरता की भारतीय परंपरा को नई ऊर्जा प्रदान करता है।