माघ मेले में शंकराचार्य का अपमान! योगी सरकार पर माफी का दबाव क्यों बढ़ा?

देहरादून। प्रयागराज माघ मेले में मौनी अमावस्या के पावन अवसर पर ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के साथ हुई कथित बदसलूकी को लेकर उत्तराखंड कांग्रेस के वरिष्ठ उपाध्यक्ष, प्रवक्ता एवं पूर्व कैबिनेट मंत्री धीरेंद्र प्रताप ने कड़ी निंदा की है। उन्होंने इस घटना को हिंदू धर्म के सर्वोच्च संत का अपमान बताते हुए उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से सार्वजनिक रूप से माफी मांगने की मांग की है।

धीरेंद्र प्रताप ने आरोप लगाया कि मौनी अमावस्या के दिन संगम घाट पर स्नान के लिए जा रहे शंकराचार्य जी के काफिले को प्रशासन द्वारा रोक दिया गया। यही नहीं, उनके साथ मौजूद साधु-संतों के साथ कथित तौर पर मारपीट भी की गई। इस घटना से आहत होकर शंकराचार्य जी धरने पर बैठ गए और अंततः उन्होंने दुखी मन से अमावस्या के पवित्र स्नान का बहिष्कार कर दिया।

उन्होंने कहा कि ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य हिंदू धर्म के सर्वोच्च एवं सम्मानित संतों में से एक हैं। ऐसे संत के साथ इस प्रकार का व्यवहार न केवल दुर्भाग्यपूर्ण है, बल्कि करोड़ों हिंदू श्रद्धालुओं की भावनाओं को आहत करने वाला है। धीरेंद्र प्रताप ने भारतीय जनता पार्टी पर दोहरे चरित्र का आरोप लगाते हुए कहा कि एक ओर पार्टी स्वयं को हिंदुओं की सबसे बड़ी हितैषी बताती है, वहीं दूसरी ओर हिंदू धर्म के शीर्ष संतों का सार्वजनिक अपमान किया जाता है।

उन्होंने इस पूरे मामले पर भाजपा अध्यक्ष जगत प्रकाश नड्डा और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रमुख मोहन भागवत से भी स्पष्टीकरण देने की मांग की है। धीरेंद्र प्रताप ने कहा कि इस घटना को लेकर हिंदू धर्मावलंबियों में भारी रोष है और यदि समय रहते जवाबदेही तय नहीं हुई, तो आक्रोश और बढ़ सकता है।

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