After Header-1

अमित शाह की बंगाल रणनीति : तीन दिन जो 2026 का चुनावी नक्शा बदल सकते हैं

आफरीन हुसैन

पश्चिम बंगाल में 2026 के विधानसभा चुनाव भले ही अभी कुछ महीनों दूर हों, लेकिन भारतीय जनता पार्टी ने अपनी चुनावी तैयारी की घड़ी पहले ही तेज़ कर दी है। इस रणनीतिक अभियान की कमान खुद केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने संभाल ली है। हाल ही में उनका तीन दिवसीय बंगाल दौरा पार्टी के 2026 मिशन की निर्णायक शुरुआत के रूप में देखा जा रहा है।
साल्ट लेक बैठक : रणनीतिक ‘रीसेट’ का संकेत

बुधवार को कोलकाता के साल्ट लेक स्थित एक होटल में अमित शाह ने बंगाल भाजपा के शीर्ष नेतृत्व के साथ एक बंद कमरे में अहम संगठनात्मक बैठक की। इसमें नेता प्रतिपक्ष शुभेंदु अधिकारी, प्रदेश अध्यक्ष समिक भट्टाचार्य, सभी सांसद-विधायक, वरिष्ठ संगठनात्मक पदाधिकारी और कई नगर निगमों के प्रमुख नेता मौजूद थे।

पार्टी सूत्रों के मुताबिक, इस बैठक में उन्हीं नेताओं को आमंत्रित किया गया जिन्हें या तो संभावित उम्मीदवार माना जा रहा है या जिन्हें चुनावी अभियान में अहम जिम्मेदारियाँ मिलने वाली हैं। इस लिहाज़ से यह बैठक 2026 की ‘डिफैक्टो शॉर्टलिस्ट’ मानी जा रही है।
दिलीप घोष फैक्टर

इस बैठक का सबसे बड़ा राजनीतिक संकेत पूर्व प्रदेश अध्यक्ष दिलीप घोष की मौजूदगी रही। बीते कुछ महीनों से उनके पार्टी से नाराज़ होने और तृणमूल कांग्रेस में जाने की अटकलें तेज़ थीं।

मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के साथ सार्वजनिक मंच साझा करने के बाद यह चर्चा और गहराई थी।
लेकिन अमित शाह द्वारा खुद दिलीप घोष से मुलाकात ने साफ संदेश दे दिया भाजपा अपने पुराने सेनापतियों को फिर से मैदान में उतारना चाहती है।
पार्टी के अंदरूनी सूत्रों के अनुसार, 2026 के चुनाव में दिलीप घोष को संगठन और प्रचार अभियान में एक प्रमुख भूमिका दी जा सकती है।
दिलीप घोष क्यों अब भी अहम हैं
बंगाल भाजपा के इतिहास में दिलीप घोष को सबसे सफल प्रदेश अध्यक्षों में गिना जाता है।

2014 लोकसभा चुनाव भाजपा के सिर्फ 3 सांसद

2019 लोकसभा चुनाव (घोष के नेतृत्व में) भाजपा ने 18 सीटें जीतीं

2021 विधानसभा चुनाव भाजपा की सीटें बढ़कर 70 हो गईं और वह मुख्य विपक्षी दल बनी उनकी जमीनी पकड़ और आक्रामक राजनीतिक शैली ने ही भाजपा को बंगाल में पहली बार तृणमूल के लिए एक वास्तविक चुनौती के रूप में खड़ा किया।
अमित शाह का संदेश : पहले एकता
बैठक में अमित शाह ने तीन प्रमुख प्राथमिकताएँ साफ तौर पर रखीं आंतरिक गुटबाज़ी पर पूर्ण विराम
बूथ स्तर पर संगठन की मज़बूती मतदाताओं के सामने एकजुट नेतृत्व की छवि उन्होंने स्पष्ट कर दिया कि व्यक्तिगत मतभेद 2026 की रणनीति को कमजोर नहीं करने चाहिए।

यह दौरा क्यों अहम है
बंगाल का पिछला विधानसभा चुनाव अप्रैल 2021 में हुआ था और 2 मई को नतीजे आए थे। 2026 में भी इसी समय-सीमा में चुनाव होने की संभावना है।ऐसे में अमित शाह का यह शुरुआती हस्तक्षेप बताता है कि भाजपा पिछली बार की संगठनात्मक कमज़ोरियों और रणनीतिक चूकों को दोहराना नहीं चाहती। यह दौरा केवल प्रतीकात्मक नहीं, बल्कि पूरी तरह रणनीतिक है।

तृणमूल को सीधा राजनीतिक संदेश
पुराने और नए भाजपा नेताओं को एक मंच पर फिर से जोड़कर अमित शाह ने स्पष्ट संकेत दे दिया है भाजपा ने 2026 के लिए अपना ‘वार रूम’ सक्रिय कर दिया है। आने वाले महीनों में संगठन, कार्यकर्ताओं और संदेश प्रणाली का आक्रामक पुनर्गठन देखने को मिलेगा और बंगाल एक बार फिर देश का सबसे तीखा चुनावी रणक्षेत्र बनने जा रहा है।

Leave A Reply

Your email address will not be published.