देहरादून। दून पुस्तकालय एवं शोध केंद्र के सभागार में मंगलवार को उत्तराखंड की सांस्कृतिक विरासत को समर्पित एक विशेष आयोजन हुआ, जिसमें हरिद्वार और देहरादून की तराई में गाए जाने वाले पारंपरिक पहाड़ताली लोकगीतों पर आधारित पुस्तक “उत्तराखंड के पहाड़ताली लोकगीत” का लोकार्पण किया गया।


यह पुस्तक डॉ. सुशीला पाल और डॉ. राजेश पाल द्वारा संकलित है तथा समय साक्ष्य प्रकाशन से प्रकाशित की गई है।
लोकार्पण के बाद आयोजित परिचर्चा में उत्तराखंड के कई वरिष्ठ साहित्यकारों और संस्कृतिकर्मियों ने इन लोकगीतों के महत्व और सांस्कृतिक समृद्धि पर विस्तार से विचार रखे। कार्यक्रम में प्रसिद्ध साहित्यकार डॉ. नंदकिशोर हटवाल ने कहा कि यह कृति उत्तराखंड की मैदानी संस्कृति के उन लोकगीतों को सामने लाती है, जो अब तक शोध और साहित्यिक अध्ययन से लगभग बाहर थे। उन्होंने कहा कि गढ़वाली, कुमाऊनी और जौनसारी लोकगीतों की तरह पहाड़ताली लोकगीतों को भी अब समग्र रूप से समझा और संरक्षित किया जा सकेगा।
वहीं, लोक संस्कृति पर अध्ययन करने वाले डॉ. सुरेंद्र दत्त सेमल्टी ने कहा कि तराई के ये लोकगीत विविधता और समृद्धि में किसी भी तरह पीछे नहीं हैं। इनमें स्थानीय जीवन, भावनाओं, सामाजिक संबंधों और सांस्कृतिक परंपराओं की अनूठी झलक मिलती है।
कार्यक्रम में लेखकीय वक्तव्य रखते हुए संकलनकर्ता डॉ. सुशीला पाल ने कहा कि इन लोकगीतों को संकलित करना केवल एक साहित्यिक प्रयास नहीं, बल्कि सांस्कृतिक विरासत को बचाने का दायित्व भी है। उन्होंने कहा कि जिस तरह जल, जंगल और जमीन की रक्षा जरूरी है, उसी तरह लोकगीतों को बचाना भी उतना ही आवश्यक है।
सह-संकलक डॉ. राजेश पाल ने बताया कि ये गीत केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं, बल्कि तराई के सामाजिक इतिहास और जीवनशैली के महत्वपूर्ण दस्तावेज हैं। उनका लुप्त हो जाना एक अमूल्य सांस्कृतिक निधि की क्षति होगी।
कार्यक्रम में पुस्तक के लोकार्पण के बाद रजनी नेगी, अनीता रायचमेली, पूनम पाल और प्रीति तोमर ने पहाड़ताली लोकगीतों की सुन्दर प्रस्तुति दी, जिसे उपस्थित दर्शकों ने खूब सराहा।
कार्यक्रम का संचालन सामाजिक इतिहासकार डॉ. योगेश धस्माना ने किया, जबकि आरंभ में केंद्र के प्रोग्राम एसोसिएट चंद्रशेखर तिवारी ने सभी अतिथियों का स्वागत किया।
इस अवसर पर राजेश सकलानी, बिजू नेगी, जितेन ठाकुर, अम्मार नकवी, डॉ. अरुण कुकसाल, दिनेश चंद्र जोशी, प्रो. रामविनय सिंह सहित अनेक साहित्यकार, लेखक, रंगकर्मी और युवा पाठक उपस्थित रहे।