सत्यनारायण मिश्रा। वरिष्ठ पत्रकार
गुवाहाटी। मानव तस्करी के खिलाफ एक बड़ी सफलता हासिल कर पूर्वोत्तर सीमांत रेलवे (एनएफआर) के रेलवे सुरक्षा बल (आरपीएफ) ने न्यू जलपाईगुड़ी रेलवे स्टेशन पर 22 जुलाई की रात को न्यू जलपाईगुड़ी-पटना कैपिटल एक्सप्रेस से 56 युवतियों को रेस्क्यू किया और दो संदिग्ध तस्करों को हिरासत में लिया। 18 से 31 वर्ष की इन युवतियों को पश्चिम बंगाल के जलपाईगुड़ी, कूचबिहार और अलीपुरदुआर ज़िलों से नौकरी दिलाने के लोभ में बिहार ले जाया जा रहा था।
पूसी रेलवे के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी कपिंजल किशोर शर्मा के मुताबिक आरपीएफ की सतर्कता ने इस गंभीर तस्करी रैकेट का भंडाफोड़ किया। नियमित जांच के दौरान आरपीएफ ने पाया कि ये युवतियां बिना वैध टिकट के यात्रा कर रही थीं। लेकिन उनके हाथों पर कोच और बर्थ नंबर लिखे थे। सुरक्षा बल ने दो संदिग्धों को धर दबोचा। एक पुरुष और एक महिला ने पूछताछ में विरोधाभासी बयान दिए और नौकरी या यात्रा से संबंधित कोई वैध दस्तावेज पेश नहीं कर सके। आरपीएफ ने तुरंत दोनों को हिरासत में लेकर राजकीय रेलवे पुलिस (जीआरपी) के हवाले कर दिया। जीआरपी और आरपीएफ की संयुक्त जांच अब इस तस्करी नेटवर्क के तार खोलने में जुटी है।
रेस्क्यू की गई सभी 56 युवतियों को तत्काल सहायता दी गई और उन्हें सुरक्षित उनके परिवारों तक पहुंचाया गया। यह ऑपरेशन न केवल आरपीएफ की सतर्कता को दर्शाता है, बल्कि रेल नेटवर्क में असुरक्षित यात्रियों, खासकर महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा के प्रति उनकी प्रतिबद्धता को भी रेखांकित करता है।
आरपीएफ की सतत सतर्कता
एनएफआर के आरपीएफ ने 2025 में अब तक चार तस्करों को गिरफ्तार किया है और छह नाबालिग लड़कों सहित 56 महिलाओं को रेस्क्यू किया है। यह आंकड़ा उनकी मानव तस्करी के खिलाफ लड़ाई में सक्रिय भूमिका को दर्शाता है। एनएफआर ने स्पष्ट किया कि वे यात्रियों की सुरक्षा, विशेषकर महिलाओं और बच्चों के लिए अपने प्रयासों को और तेज करेंगे।
आगे की जांच जारी
यह मामला क्षेत्र में सक्रिय मानव तस्करी के नेटवर्क पर गहरी नजर रखने की जरूरत को उजागर करता है। जीआरपी और आरपीएफ की टीमें इस रैकेट के पीछे के मास्टरमाइंड तक पहुंचने के लिए गहन जांच कर रही हैं।
पूर्वोत्तर सीमांत रेलवे और आरपीएफ की इस कार्रवाई ने एक बार फिर साबित कर दिया कि मानव तस्करी के खिलाफ उनकी जीरो टॉलरेंस नीति और सतर्कता अपराधियों के लिए चुनौती बन रही है।