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मिज़ोरम से अनोखी पहल: मुफ्त सब्जी स्टॉल, लालच छोड़ें, जरूरत भर लें!

सत्यनारायण मिश्र, वरिष्ठ पत्रकार
आईजोल। मिज़ोरम के कोलासिब में एक दयालु किसान ने एक ऐसी पहल शुरू की है, जिसकी शायद देश के मुख्य भूभाग में कल्पना भी नहीं की जा सकती! इस किसान ने अपने खेत की ताज़ा सब्जियों से भरा एक मुफ्त स्टॉल लगाया है, जिसके साथ एक सीधा-साधा संदेश है: “मुफ्त, मुफ्त। जितनी जरूरत हो, उतना ही लें और दूसरों के लिए भी छोड़ें।”

इस स्टॉल पर कोई कीमत नहीं, कोई दुकानदार नहीं, सिर्फ एक नियम है – लालच न करें, क्योंकि दूसरों को भी जरूरत है। यह पहल न केवल उदारता को बढ़ावा देती है, बल्कि मिज़ो संस्कृति की एक लोकप्रिय कहावत को भी जीवंत करती है: “सेम सेम, दम दम; ई बिल, थी थी”, जिसका अर्थ है – “जो बांटते हैं, वे जीते हैं; जो जमा करते हैं, वे मरते हैं।”

यह कहावत और यह स्टॉल दोनों ही एक ही संदेश देते हैं – उदारता जीवन है, लालच हानिकारक। मिज़ोरम का यह छोटा सा प्रयास देश के लिए एक बड़ा सबक है, जो सिखाता है कि साझा करने में ही सच्ची खुशी है।

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