महिला अस्पताल में विटामिन ए की ड्रॉप और प्रेग्नेंसी रोकने वाले इंजेक्शन की किल्लत, मरीजों को हो रही परेशानी
उत्तराखंड के हल्द्वानी स्थित महिला अस्पताल में विटामिन ए की ड्रॉप और प्रेग्नेंसी रोकने वाले इंजेक्शन की कमी से मरीजों को गंभीर समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। महिला अस्पताल में विटामिन ए की ड्रॉप जो नवजात शिशुओं को दी जाती है, वह पिछले कुछ समय से उपलब्ध नहीं है। इसके अलावा, प्रेग्नेंसी रोकने वाले इंजेक्शन भी पिछले छह महीनों से अस्पताल में नहीं मिल रहे हैं, जिससे बड़ी संख्या में महिलाओं को समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है।
विटामिन ए ड्रॉप की कमी और समस्याएं
महिला अस्पताल में विटामिन ए की ड्रॉप की भारी कमी हो गई है। यह ड्रॉप नवजात बच्चों को दी जाती है, जो उनके शारीरिक विकास के लिए महत्वपूर्ण होती है। विटामिन ए की कमी से बच्चों में आंखों की बीमारियां, इन्फेक्शन और अन्य स्वास्थ्य समस्याएं हो सकती हैं। विटामिन ए की ड्रॉप का समय पर वितरण न होने के कारण, परिजनों को मजबूरन इसे बाहर से खरीदना पड़ रहा है, जो कई बार महंगा भी साबित हो सकता है।
अस्पताल प्रशासन का कहना है कि विटामिन ए की ड्रॉप की सप्लाई में रुकावट आई है। बाहर से सप्लाई नहीं हो रही है, जिससे यह समस्या उत्पन्न हुई है। इस कमी के कारण, नवजात बच्चों के स्वास्थ्य पर भी असर पड़ सकता है।
प्रेग्नेंसी रोकने वाले इंजेक्शनों की कमी
वहीं, प्रेग्नेंसी रोकने वाले इंजेक्शन भी महिला अस्पताल में लंबे समय से नहीं मिल रहे हैं। ये इंजेक्शन गर्भवती महिलाओं को दिए जाते हैं जो अनचाहे गर्भ से बचने के लिए इसका इस्तेमाल करती हैं। इन इंजेक्शनों का अस्पताल में न होना, खासकर उन महिलाओं के लिए बड़ी परेशानी का कारण बन रहा है, जिन्हें अस्पताल में यह निःशुल्क मिलते थे।
हर दिन अस्पताल में 350 से 400 महिलाओं की ओपीडी होती है, जिनमें से अधिकतर गर्भवती महिलाएं होती हैं। इन महिलाओं को गर्भवती होने के बाद विभिन्न स्वास्थ्य समस्याओं से बचाव के लिए इन इंजेक्शनों की जरूरत होती है। इसके अलावा, अस्पताल में हर रोज 5-6 डिलीवरी भी होती हैं, जिससे यह स्पष्ट है कि यहां आने वाली महिलाओं की संख्या बहुत अधिक है और इनकी जरूरतें भी बहुत अधिक हैं।
अस्पताल प्रशासन की स्थिति
महिला अस्पताल के सीएमएस डॉ. उपा जंगपांगी ने इस स्थिति पर प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने बताया कि विटामिन ए की ड्रॉप और प्रेग्नेंसी रोकने के इंजेक्शन दोनों ही पिछले छह महीने से अस्पताल में उपलब्ध नहीं हैं। उन्होंने यह भी कहा कि इस बारे में सीएमओ और निदेशालय को पत्राचार किया गया है, लेकिन अभी तक सप्लाई की कोई स्पष्ट व्यवस्था नहीं हो पाई है।
यह स्थिति तब और गंभीर हो जाती है, जब अस्पताल में आने वाली महिलाओं की संख्या लगातार बढ़ रही है, और निःशुल्क सेवाएं प्रदान करने का उद्देश्य भी ध्वस्त हो रहा है। इससे न केवल अस्पताल के कर्मचारियों की परेशानी बढ़ रही है, बल्कि मरीजों को भी भारी वित्तीय बोझ उठाना पड़ रहा है।
आवश्यक कदम और समाधान
इस स्थिति को देखते हुए, स्वास्थ्य विभाग को शीघ्र ही इस समस्या का समाधान निकालने की आवश्यकता है। विटामिन ए की ड्रॉप और प्रेग्नेंसी रोकने के इंजेक्शनों की आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए ठोस कदम उठाए जाने चाहिए।
साथ ही, अस्पताल प्रशासन को यह भी सुनिश्चित करना होगा कि आने वाली आपूर्ति समय पर हो, ताकि मरीजों को न तो किसी प्रकार की स्वास्थ्य समस्या हो, और न ही उन्हें अतिरिक्त खर्च उठाना पड़े। यदि यह समस्या जल्द हल नहीं हुई, तो अस्पताल के कार्यभार और मरीजों की जरूरतों का सही तरीके से प्रबंधन करना मुश्किल हो सकता है।
निष्कर्ष
महिला अस्पताल में विटामिन ए की ड्रॉप और प्रेग्नेंसी रोकने वाले इंजेक्शनों की कमी एक गंभीर मुद्दा बन चुका है, जो न केवल मरीजों की परेशानी को बढ़ा रहा है, बल्कि अस्पताल की सेवाओं की गुणवत्ता पर भी सवाल खड़े कर रहा है। इस समस्या का शीघ्र समाधान होना बेहद जरूरी है, ताकि महिलाओं और नवजात बच्चों के स्वास्थ्य को सुनिश्चित किया जा सके और अस्पताल में आने वाले मरीजों को समुचित चिकित्सा सेवाएं मिल सकें।
