मुंबई। भारतीय युवा बल्लेबाज़ यशस्वी जायसवाल आगामी 2025-26 घरेलू क्रिकेट सत्र में भी मुंबई का प्रतिनिधित्व करते नजर आएंगे। मुंबई क्रिकेट संघ (एमसीए) ने मंगलवार को पुष्टि की कि जायसवाल द्वारा गोवा जाने के लिए मांगी गई अनापत्ति प्रमाण पत्र (एनओसी) को वापस लेने के अनुरोध को स्वीकार कर लिया गया है। इस फैसले के साथ ही यह स्पष्ट हो गया है कि यह प्रतिभाशाली खिलाड़ी फिलहाल किसी अन्य राज्य संघ में नहीं जाएगा।
एमसीए के अध्यक्ष अजिंक्य नाइक ने प्रेस विज्ञप्ति में कहा, “यशस्वी हमेशा से मुंबई क्रिकेट की एक गौरवशाली उपज रहे हैं। उन्होंने जूनियर स्तर से लेकर प्रथम श्रेणी तक मुंबई के लिए उत्कृष्ट प्रदर्शन किया है। हम उनके एनओसी वापसी के आवेदन को स्वीकार करते हुए खुशी महसूस कर रहे हैं और आशा करते हैं कि वे आने वाले वर्षों में मुंबई क्रिकेट को और मजबूती प्रदान करेंगे।”
गौरतलब है कि अप्रैल 2025 में यशस्वी जायसवाल ने गोवा की टीम से खेलने के इरादे से एमसीए से एनओसी की मांग की थी। इस कदम को एमसीए ने “चौंकाने वाला” बताया था, क्योंकि जायसवाल को मुंबई क्रिकेट के भविष्य का अहम स्तंभ माना जाता रहा है। हालांकि, कुछ ही हफ्तों बाद उन्होंने अपना निर्णय बदलते हुए एनओसी को वापस लेने की अपील की और अपने फैसले के पीछे पारिवारिक कारणों का हवाला दिया।
जायसवाल ने अपने पत्र में बताया कि वे अपने परिवार के साथ गोवा स्थानांतरित होने की योजना बना रहे थे, लेकिन बाद में उन्होंने यह विचार त्याग दिया। उन्होंने कहा कि वे अपनी जड़ें मुंबई में ही मानते हैं और यहां से खेलना ही उनके लिए गर्व की बात है।
घरेलू प्रदर्शन
23 वर्षीय यशस्वी जायसवाल ने 2019 में प्रथम श्रेणी क्रिकेट में पदार्पण किया था और तब से अब तक उन्होंने 10 मैचों में 53.93 की औसत से 863 रन बनाए हैं। इस दौरान उन्होंने चार शतक और दो अर्धशतक लगाए हैं, जिसमें उत्तर प्रदेश के खिलाफ खेली गई 181 रन की पारी उनकी सर्वश्रेष्ठ रही है।
हाल ही में समाप्त हुए 2024-25 के घरेलू सत्र में भी उन्होंने मुंबई के लिए अहम भूमिका निभाई। उन्होंने जम्मू-कश्मीर के खिलाफ रणजी ट्रॉफी मैच में भाग लिया था, हालांकि मुंबई को उस मैच में हार झेलनी पड़ी। इसके बाद वे विदर्भ के खिलाफ सेमीफाइनल में खेलने वाले थे, लेकिन अभ्यास के दौरान टखने में चोट लगने के कारण टीम से बाहर हो गए।
अंतरराष्ट्रीय मोर्चे पर सक्रिय
वर्तमान में जायसवाल इंग्लैंड दौरे पर भारतीय टेस्ट टीम के साथ हैं। उन्होंने लीड्स में खेले गए पहले टेस्ट मैच में शानदार शतक जमाया, जो उनके अंतरराष्ट्रीय करियर का एक और अहम मुकाम बन गया। हालांकि भारत उस मुकाबले में पांच विकेट से हार गया, लेकिन जायसवाल के प्रदर्शन की व्यापक सराहना हुई।
यशस्वी जायसवाल की कहानी न सिर्फ क्रिकेट में उनके उत्थान की है, बल्कि यह एक युवा खिलाड़ी के भावनात्मक जुड़ाव और निष्ठा की भी मिसाल है। उन्होंने जब 12 साल की उम्र में उत्तर प्रदेश से मुंबई आकर यहां की गलियों में संघर्ष शुरू किया था, तब शायद ही किसी ने सोचा होगा कि एक दिन वे भारतीय टेस्ट टीम का हिस्सा बनेंगे। अब, जब उनके पास अन्य विकल्प खुले थे, उन्होंने एक बार फिर अपने उस शहर को चुना जिसने उन्हें क्रिकेटर बनाया।
मुंबई क्रिकेट संघ और इसके समर्थक इस फैसले से निश्चित ही उत्साहित होंगे, क्योंकि जायसवाल जैसे खिलाड़ी का साथ मुंबई की टीम को आने वाले वर्षों में नई ऊंचाइयों तक ले जा सकता है।