भाकृअनुप। विवेकानन्द पर्वतीय कृषि अनुसंधान संस्थान अल्मोड़ा के प्रयोगात्मक प्रक्षेत्रा हवालबाग में जलवायु परिवर्तन के प्रभावों के प्रति संवेदीकरण विषय पर दो दिवसीय कृषक जागरूकता कार्यशाला का शुभारंभ भाकृअनुपगीत के साथ किया गया।
इस अवसर पर मुख्य अतिथि डाॅ एम. मधु, निदेषक, भाकृअनुप भारतीय मृदा एवं जल संरक्षण संस्थान देहरादून ने कहा कि हमारे कृषक एवं शोध संस्थान बहुत अच्छा कार्य कर रहे हैं जिसके फलस्वरूप आज भारत वर्ष स्वयं फसल उत्पादन करने के साथ ही विदेषों को भी निर्यात कर रहा है।उन्होंने कृषकों को भविष्य में व्यापारी किसान के रूप में देखने हेतु कहा।उन्होंने कहा आज हमें प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण एवं फसल विविधिकरण की आवष्यकता है तभी हम जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों से निपटने में सक्षम हो सकते हैं। इस अवसर पर विषिष्ट अतिथि प्रो. सुनील नौटियाल निदेषक, गोविन्द बल्लभ पंत राष्ट्रीय हिमालय पर्यावरण संस्थान अल्मोड़ा ने कहा कि जलवायु परिवर्तन के मध्ये नजर आज कृषि करना अत्यन्त चुनौती पूर्ण है।भाकृअनुप-विवेकानन्द पर्वतीय कृषि अनुसंधान संस्थान अल्मोड़ा उत्कृष्ट कार्य कर रहा है तभी यहां के किये गये शोधों को सभी आत्मसात कर रह हैं।
उन्हों ने सभी के समक्ष पारिस्थिति की तंत्रा के महत्व को बताते हुए अपने संस्थान में किये जार हे शोध कार्यों की जानकारी दी तथा औषधीय पौंधों द्वारा आय बढ़ाने पर बल दिया।विषिष्ट अतिथि डाॅ. एके मोहन्ती संयुक्तनिदेशक भाकृअनुप-भारतीय पषु-चिकित्सा अनुसंधान संस्थान, मुक्तेष्वर ने कहा कि पषुधन एक अमूल्य संपदा है।उन्हों ने कृषकों को पशुधन प्रबन्धन एवं इस को पर्यावरण संरक्षण हेतु लाभ प्रदबनाने की जानकारी दी। इस संस्थान के निदेषक डाॅ लक्ष्मी कान्त द्वारा जलवायु परिवर्तन के प्रभावों एवं उनके निराकरण हेतु विकसित प्रजातियों एवं तकनीकियों की जानकारी दी।
अन्तर्राष्ट्रीय कदन्नवर्ष 2023 को देखते हुए उन्होंने कदन्न फसलों की विषेषताओं एवं संस्थान द्वारा इन फसलों की विकसित प्रजातियों से सभी आगन्तुकों को अवगत कराया।कार्यक्रम के आरंभ में डाॅ बृजमोहन पाण्डे, कार्यक्रम समन्व्यक ने जलवायु परिवर्तन हेतु कृषक धारणा एवं जागरूकता-हिमालयी कृषि पर कार्य बल विषय पर प्रस्तुती करण दिया तथा कार्यक्रम का सफल संचालन किया।
इस कार्यषाला में अल्मोड़ा, नैनीताल, बागेष्वर तथा चमोली जिले के 135कृष कों एवं विद्यार्थियों ने भागीदारी की।साथ ही कुछ कृष कों ने इस अवसर पर अपने विचार व्यक्त किये। धन्यवाद प्रस्ताव डाॅ. कुषाग्रा जोषी, वरिष्ठ वैज्ञानिक ने ज्ञापित किया।
