जितेन्द्र नारायण त्यागी को न्यायालय से नहीं मिला जमान

नैनीताल। भडकाऊ भाषण मामले में जेल में बंद जितेन्द्र नारायण त्यागी उर्फ वसीम रिजवी को उत्तराखंड उच्च न्यायालय से जमानत नहीं मिल पायी। अदालत ने सरकार से आरोपी के खिलाफ दर्ज विभिन्न मामलों को लेकर 23 फरवरी तक विस्तृत रिपोर्ट पेश करने को कहा है।

आरोपी की ओर से अदालत से कहा गया कि हरिद्वार जिला एवं सत्र न्यायालय से इसी मामले में सह अभियुक्त स्वामी यति नरसिंहानंद को जमानत मिल चुकी है। उन पर जो आरोप लगाये गये हैं वह बेबुनियाद हैं। धर्म परिवर्तन के चलते उन पर मामला दर्ज किया गया हैं।

उन्होंने एक किताब भी लिखी है, उसको लेकर भी किसी को कोई आपत्ति नहीं है। दूसरी ओर शिकायर्तकर्ता की ओर से उनकी जमानत का विरोध करते हुए कहा गया कि आरोपी का एक आपराधिक इतिहास है। उनके खिलाफ विभिन्न अभियोगों में 30 मामले दर्ज हैं। इनमें धारा 302 और 376 के तहत भी अभियोग शामिल हैं। महाराष्ट्र में भी एक मामला दर्ज है।

आरोपी की ओर से यह भी कहा गया कि धर्म संसद प्रकरण में उच्चतम न्यायालय के हस्तक्षेप के बाद आरोपी की गिरफ्तारी हो पायी है। वादी की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता राकेश थपलियाल अदालत में पेश हुए। उन्होंने कहा कि उपरोक्त सभी प्रकरण उत्तर प्रदेश में दर्ज हैं और आरोपी दस साल तक उप्र में शिया वक्फ बोर्ड के चेयरमैन रहे हैं। उनके विरोधियों की ओर से ये मामले दर्ज किये गये हैं।

किसी भी अभियोग में आज तक दोषी सिद्ध नहीं हुए हैं। इसके बाद न्यायमूर्ति रमेश चंद्र खुल्बे की पीठ ने सरकार से कहा कि वह वादी के खिलाफ दर्ज सभी मुकदमों की एक व्यापक प्रगति रिपोर्ट 23 फरवरी तक अदालत में पेश करें। रिपोर्ट में दर्ज मामलों के सापेक्ष कितने लंबित हैं और कितने में सजा हुई और कितने मामलों में रिमांड पर लिया गया है। अगली सुनवाई 23 दिसंबर को होगी।

गौरतलब है कि आरोपी पर तीर्थनगरी हरिद्वार में 17 से 19 दिसंबर के मध्य हुए धर्म संसद में भड़काऊ भाषण देने का आरोप है। सोशल मीडिया में वायरल वीडियों के बाद कुछ लोगों की शिकायत पर उनके खिलाफ अभियोग दर्ज किया गया। इसके बाद पुलिस ने धर्म परिवर्तन कर हिन्दू बने जितेन्द्र नारायण त्यागी उर्फ वसीम रिजवी को 13 जनवरी को गिरफ्तार कर लिया और जेल भेज दिया।

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