काठमांडू, 16 अक्टूबर। नेपाल सरकार ने बाढ़ प्रभावित रसुवा जिले के लोगों को राहत देने के लिए अस्थायी आवास बनाने की योजना तैयार की है। सरकार ने इसके लिए ‘प्रीफैब मॉड्यूलर होम’ मॉडल को मंजूरी दी है। इन घरों का निर्माण करीब 5 लाख नेपाली रुपये की लागत से किया जाएगा। प्रत्येक घर में दो कमरे, एक किचन और एक शौचालय होगा।
बुनियादी ढांचा विकास मंत्रालय ने राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण की कार्यकारी समिति के निर्देशों के बाद इस मॉडल को स्वीकृति दी है। 26 अगस्त को आई बाढ़ से प्रभावित परिवारों के लिए उपयुक्त आवास का चयन करने की जिम्मेदारी मंत्रालय को सौंपी गई थी।
आपदा प्रभावितों को जल्द मिलेगी राहत
मंत्री सुनील लम्साल के सलाहकार सुमन प्रधान के मुताबिक, नेपाल में बाढ़, भूस्खलन और भूकंप जैसी प्राकृतिक आपदाओं का खतरा बना रहता है। इसी को ध्यान में रखते हुए ऐसे अस्थायी घर तैयार करने का निर्णय लिया गया है, जिनका भविष्य में दूसरी आपदाओं के दौरान भी इस्तेमाल किया जा सके।
प्रीफैब मॉड्यूलर घरों के विभिन्न हिस्से कारखाने या निर्धारित स्थान पर पहले से तैयार किए जाते हैं। इसके बाद उन्हें प्रभावित क्षेत्र में ले जाकर जोड़कर घर बनाया जाता है। इस तकनीक से पारंपरिक कंक्रीट के मकानों की तुलना में कम समय में निर्माण संभव है।
270 वर्गफुट में होगा घर का निर्माण
मंत्रालय के स्वीकृत मॉडल के अनुसार, प्रत्येक घर का क्षेत्रफल 270 वर्गफुट होगा। इसमें परिवार की बुनियादी जरूरतों को ध्यान में रखते हुए दो कमरे, रसोई और शौचालय की व्यवस्था की जाएगी। इन घरों को जरूरत पड़ने पर खोलकर दूसरी जगह ले जाने और दोबारा इस्तेमाल करने की सुविधा भी होगी।
सरकार का उद्देश्य प्रभावित परिवारों को स्थायी पुनर्वास होने तक सुरक्षित आवास उपलब्ध कराना है। इसके बाद इन संरचनाओं को दूसरे आपदा प्रभावित क्षेत्रों में भी उपयोग किया जा सकेगा।
रसुवा में 32 हजार से अधिक लोग प्रभावित
प्राधिकरण के प्रारंभिक अध्ययन के अनुसार, रसुवा जिले में बाढ़ से 7,570 निजी मकानों को नुकसान पहुंचा है। इस आपदा से 8,317 परिवारों के कुल 32,963 लोग प्रभावित हुए हैं।
फिलहाल स्थानीय निकाय प्रभावित परिवारों की पहचान कर रहे हैं। प्रक्रिया पूरी होने के बाद पात्र लाभार्थियों को अस्थायी आवास उपलब्ध कराए जाएंगे। वर्तमान में प्रभावितों में से करीब 60 से 70 प्रतिशत लोग सरकारी आर्थिक सहायता लेकर किराये के मकानों में रह रहे हैं।
सरकार की इस योजना से प्रभावित परिवारों को स्थायी पुनर्वास तक रहने के लिए एक वैकल्पिक आवास मिलने की उम्मीद है।
