नई दिल्ली। वैश्विक रेटिंग एजेंसी एसएंडपी ग्लोबल रेटिंग्स ने चालू वित्त वर्ष 2026-27 के लिए भारत की आर्थिक वृद्धि का अनुमान बढ़ाकर सात फीसदी कर दिया है। इससे पहले एजेंसी ने जीडीपी वृद्धि दर 6.6 फीसदी रहने का अनुमान जताया था। एसएंडपी ने आर्थिक गतिविधियों में मजबूती को वृद्धि अनुमान बढ़ाने की प्रमुख वजह बताया है।
एसएंडपी की ‘इकोनॉमिक एक्टिविटी फॉर एशिया पैसिफिक’ रिपोर्ट के मुताबिक, वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में भारत की आर्थिक वृद्धि दर 7.8 फीसदी रही। एजेंसी के अनुसार मजबूत औद्योगिक गतिविधियों, घरेलू खपत में मजबूती, वस्तुओं के बेहतर निर्यात और सरकारी निवेश में तेजी से आर्थिक गतिविधियों को गति मिली है।
हालांकि, एसएंडपी ने वित्त वर्ष की दूसरी छमाही में विकास की रफ्तार कुछ कम होने की संभावना जताई है। एजेंसी के मुताबिक जीएसटी में किए गए युक्तिसंगत बदलाव और आयकर में कटौती से मिलने वाला शुरुआती लाभ आगे कम हो सकता है। इसके अलावा मौसम से जुड़े जोखिमों पर भी नजर रखने की जरूरत है।
रिपोर्ट में वित्त वर्ष 2026-27 के दौरान उपभोक्ता मुद्रास्फीति औसतन 5.1 फीसदी रहने का अनुमान लगाया गया है। एसएंडपी के मुताबिक 9 सितंबर 2026 तक मानसून सीजन में संचयी बारिश सामान्य से 15 फीसदी कम रही है। ऐसे में कृषि उत्पादन और खाद्य महंगाई आने वाले समय में अर्थव्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण कारक रहेंगे।
रेटिंग एजेंसी ने यह भी अनुमान जताया है कि भारतीय रिजर्व बैंक चालू वित्त वर्ष में नीतिगत दर में 0.25 फीसदी की बढ़ोतरी कर सकता है। एसएंडपी के अनुसार मजबूत आर्थिक वृद्धि, मुद्रास्फीति संबंधी दबाव, पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष और मौसम संबंधी जोखिम ब्याज दरों को प्रभावित करने वाले प्रमुख कारक हो सकते हैं।
इससे पहले मूडीज ने भी वित्त वर्ष 2026-27 के लिए भारत की जीडीपी वृद्धि का अनुमान बढ़ाकर सात फीसदी किया था। एसएंडपी का सात फीसदी का अनुमान आरबीआई के 6.7 फीसदी और फिच रेटिंग्स के 6.4 फीसदी के अनुमान से अधिक है। वहीं, वित्त वर्ष 2025-26 में भारत की आर्थिक वृद्धि दर 7.8 फीसदी रही थी।