नई दिल्ली । भारतीय वाहन बाजार में ग्राहकों की पसंद तेजी से बदल रही है। सीएनजी, हाइब्रिड और इलेक्ट्रिक वाहनों की मांग बढ़ने के साथ अगस्त 2026 में पहली बार वैकल्पिक ईंधन से चलने वाली कारों की संयुक्त हिस्सेदारी पेट्रोल वाहनों से अधिक हो गई। फेडरेशन ऑफ ऑटोमोबाइल डीलर्स एसोसिएशंस (फाडा) के आंकड़ों के अनुसार, अगस्त में वैकल्पिक ईंधन वाली कारों की कुल हिस्सेदारी 41.95 प्रतिशत रही, जबकि पेट्रोल वाहनों की हिस्सेदारी घटकर 40.85 प्रतिशत रह गई।
एक साल पहले तक पेट्रोल वाहनों की हिस्सेदारी वैकल्पिक ईंधन वाले वाहनों से करीब 11 प्रतिशत अंक अधिक थी। अगस्त में सीएनजी वाहनों की हिस्सेदारी 25.28 प्रतिशत रही। इसके बाद हाइब्रिड 9.04 प्रतिशत और इलेक्ट्रिक वाहन 7.63 प्रतिशत पर रहे। डीजल वाहनों की हिस्सेदारी करीब 17 प्रतिशत रही। हालांकि पेट्रोल अब भी व्यक्तिगत रूप से सबसे बड़ी श्रेणी है, लेकिन वैकल्पिक ईंधन वाले वाहनों का संयुक्त आंकड़ा पहली बार उससे आगे निकल गया।
बाजार में आने वाले नए मॉडल इस बदलाव को और गति दे सकते हैं। हुंडई दिसंबर 2027 तक 10 लाख रुपये से कम कीमत वाली छोटी इलेक्ट्रिक कार पेश करने की तैयारी में है। वहीं, मारुति सुजुकी की छोटी इलेक्ट्रिक कार अगले वित्त वर्ष के अंत तक बाजार में आने की उम्मीद है। इससे खासकर मध्यम वर्ग के ग्राहकों के लिए किफायती इलेक्ट्रिक विकल्प बढ़ेंगे।
फाडा अध्यक्ष साई गिरिधर के मुताबिक अगस्त में देशभर में कुल 24,23,201 वाहनों की खुदरा बिक्री हुई, जो पिछले साल के मुकाबले 17.51 प्रतिशत अधिक है। हालांकि जुलाई की तुलना में बिक्री 6.48 प्रतिशत कम रही। मानसून और त्योहारी खरीद का कुछ हिस्सा सितंबर में खिसकने को इसका कारण माना गया है।
अगस्त में दोपहिया वाहनों की बिक्री 19.69 प्रतिशत, यात्री वाहनों की 16.14 प्रतिशत और वाणिज्यिक वाहनों की 14.45 प्रतिशत बढ़ी। तिपहिया वाहनों में भी 8.64 प्रतिशत वृद्धि दर्ज हुई। ईंधन लागत, कम परिचालन खर्च और ग्राहकों की बदलती प्राथमिकताएं वैकल्पिक वाहनों की बढ़ती मांग के प्रमुख कारण माने जा रहे हैं।