केदारनाथ-बदरीनाथ पर चढ़ावा और सोने के दाग
ज्योति पंत
देहरादून। चारधाम यात्रा की फिर तैयारी शुरू है, लेकिन इस बार यात्रा का रंग फीका रहा। सरकार दावे कर रही है, पर्यटन विभाग कागजी घोड़े दौड़ा रहा है, लेकिन बारिश ने यात्रा की धज्जियां उड़ा दी हैं। जमीनी हकीकत यह है कि यात्रा मार्ग में सैकड़ों डेंजर जोन मरम्मत का इंतजार कर रहे हैं, और श्रद्धालु धामों से मुंह मोड़ रहे हैं।
तथ्य-जांच: 1500 डेंजर जोन का सच
आपने 1500 डेंजर जोन का आंकड़ा दिया है। आधिकारिक रिकॉर्ड इससे अलग है। आपदा प्रबंधन विभाग और IG गढ़वाल के अनुसार चारधाम रूट पर लगभग 700 अति संवेदनशील लैंडस्लाइड जोन चिन्हित हैं। 6 सितंबर 2026 को ही भारी बारिश से पूरे प्रदेश में 136 सड़कें बंद थीं। अकेले रुद्रप्रयाग जिले में 35 से ज्यादा डेंजर जोन हैं। फाटा-तरसाली, सिरोबगड़, तोताघाटी, भानेरपानी, मुनकटिया आज भी सबसे बड़े नासूर हैं। बारिश बंद हुए बिना पहाड़ पर ट्रीटमेंट संभव नहीं है, और बिना ट्रीटमेंट के काम करना जानलेवा है।
केदारनाथ-बदरीनाथ पर आस्था को लगा सबसे बड़ा झटका
केदारनाथ सोना परत कांड:2022 में मुंबई के एक दानदाता ने 23.78 किलो सोना दान किया, गर्भगृह में 550 प्लेटें लगाई गईं। बाद में तीर्थ पुरोहित संतोष त्रिवेदी और फिर शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद ने 228 किलो सोना गायब होने और तांबे पर सोने की पॉलिश का आरोप लगाया। सरकार ने गढ़वाल कमिश्नर विनय शंकर पांडे से जांच कराई, रिपोर्ट में क्लीन चिट दी गई, लेकिन श्रद्धालुओं के मन में शक बैठ गया। वीडियो वायरल हुआ कि रात में गर्भगृह में पॉलिश क्यों हो रही है। आस्था को चोट लगी।
बदरीनाथ चढ़ावा कांड: यह सबसे ताजा और शर्मनाक है। 2 जुलाई 2026 को बदरीनाथ धाम में 16 लाख से अधिक के चढ़ावे की गिनती के दौरान BKTC अध्यक्ष के PA प्रमोद नौटियाल पर मोबाइल के नीचे नोटों के बंडल छिपाने का आरोप लगा। CCTV फुटेज वायरल हुआ। SIT बनी, 12 जुलाई को नौटियाल देहरादून से गिरफ्तार हुआ, फिर JP कंपनी के कर्मचारी मनोज कुमार समेत 3 गिरफ्तारियां हुईं। अब मंदिर में बिना जेब वाली ड्रेस अनिवार्य कर दी गई है। कांग्रेस विधायक लखपत बुटोला को मौन व्रत पर बैठना पड़ा। जब पुजारी ही चढ़ावा चुराएंगे तो श्रद्धालु क्यों आएंगे?
खराब रास्ते, पलटती गाड़ियां और निष्क्रिय पर्यटन
धामों के रास्ते बेहद खराब हैं। तोताघाटी में आधुनिक तकनीक से पहाड़ थामा जा रहा है, लेकिन अभी भी स्लोप स्टेबलाइजेशन अधूरा है। वाहनों का पलटना, श्रद्धालुओं की मौत ने व्यवस्थाओं की पोल खोल दी है। होल्डिंग एरिया में यात्रियों को घंटों रोका जा रहा है।
और इन सबका रख-रखाव तथा इंतजाम देखता है पर्यटन विभाग। जो पूरी तरह निष्क्रिय है। मंत्री सतपाल महाराज कागजी शेर हैं। वे देहरादून में विज्ञप्ति जारी करते हैं, जमीन पर एक इंच काम नहीं। यदि मुख्यमंत्री धामी खुद मॉनिटरिंग न करें तो यात्रा कब की बंद हो चुकी होती।
आस्था के नाम पर यह घिनौना खेल खत्म होगा, पारदर्शी व्यवस्था, जेब-कट ड्रेस नहीं बल्कि ईमानदार तंत्र आएगा, तभी श्रद्धालु फिर से केदार-बदरी लौटेंगे।