शिमला, 23 अगस्त। पूर्व मुख्यमंत्री एवं पूर्व केंद्रीय मंत्री शांता कुमार ने ‘वंदे मातरम्’ के मूल स्वरूप से दो छंद हटाए जाने को लेकर कांग्रेस पर तीखा निशाना साधा है। उन्होंने सवाल उठाया कि आजादी के करीब आठ दशक बाद भी क्या भारत को जिन्ना और मुस्लिम लीग की उस समय की आपत्तियों के आधार पर आगे बढ़ना चाहिए।
शांता कुमार ने रविवार को जारी बयान में कहा कि वर्ष 1937 तक ‘वंदे मातरम्’ का पूरा गीत गाया जाता था। उनके अनुसार, 1937 में मोहम्मद अली जिन्ना और मुस्लिम लीग ने गीत के दो छंदों पर आपत्ति जताई थी। उन्होंने दावा किया कि इन छंदों में हिंदू धर्म की देवियों लक्ष्मी और दुर्गा का वंदन किया गया था। इसके बाद कांग्रेस ने प्रस्ताव पारित कर इन दोनों छंदों को हटाने का निर्णय लिया।
पूर्व केंद्रीय मंत्री ने कांग्रेस से सवाल किया कि उसे देवी लक्ष्मी और देवी दुर्गा के वंदन से आखिर क्या आपत्ति थी। उन्होंने कहा कि देश को अब इस विषय पर गंभीरता से विचार करना चाहिए कि स्वतंत्रता के 80 वर्ष बाद भी क्या उस दौर में मुस्लिम लीग की ओर से उठाई गई आपत्तियों को आधार बनाकर राष्ट्रीय प्रतीकों और परंपराओं को देखा जाना उचित है।
शांता कुमार ने कांग्रेस पर राजनीतिक हमला बोलते हुए आरोप लगाया कि आज के भारत का सबसे बड़ा दुर्भाग्य यह है कि कांग्रेस ही मुस्लिम लीग बन गई है। उन्होंने कहा कि देश का जागरूक समाज ‘वंदे मातरम्’ के साथ हुए इस कथित अन्याय को स्वीकार नहीं करेगा।
उन्होंने कहा कि ‘वंदे मातरम्’ केवल एक गीत नहीं, बल्कि भारत के स्वतंत्रता संग्राम और राष्ट्रीय चेतना से गहराई से जुड़ा हुआ है। स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान इस गीत ने लोगों में देशभक्ति और राष्ट्रभावना जगाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।
शांता कुमार ने कहा कि ‘वंदे मातरम्’ के ऐतिहासिक स्वरूप और उससे जुड़े निर्णयों पर देश में गंभीरता से चर्चा होनी चाहिए। उन्होंने इस पूरे विषय को वर्तमान भारत के संदर्भ में देखने की आवश्यकता पर भी जोर दिया।