लगातार चोटों से परेशान टीम इंडिया, गावस्कर ने ट्रेनिंग सिस्टम पर उठाए सवाल

मुंबई: भारतीय क्रिकेट टीम के खिलाड़ियों के लगातार चोटिल होने पर पूर्व कप्तान सुनील गावस्कर ने चिंता जताई है। उन्होंने खिलाड़ियों की फिटनेस और ट्रेनिंग व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए कहा कि केवल जिम में फिट रहना पर्याप्त नहीं है, बल्कि खिलाड़ियों का मैच फिट होना ज्यादा जरूरी है। गावस्कर की इस टिप्पणी ने भारतीय टीम के मौजूदा ट्रेनिंग और वर्कलोड मैनेजमेंट को लेकर बहस तेज कर दी है।

भारतीय टीम के कई प्रमुख खिलाड़ी इस समय चोटों से जूझ रहे हैं। तेज गेंदबाज जसप्रीत बुमराह के अलावा साई सुदर्शन, वॉशिंगटन सुंदर, हार्दिक पंड्या, नीतीश कुमार रेड्डी और हर्षित राणा भी चोट के कारण टीम से बाहर बताए जा रहे हैं। लगातार खिलाड़ियों के उपलब्ध नहीं रहने से टीम संयोजन और आगामी मुकाबलों की तैयारियों पर असर पड़ रहा है।

गावस्कर ने खास तौर पर खिलाड़ियों में बार-बार सामने आ रही हैमस्ट्रिंग इंजरी को गंभीरता से लेने की जरूरत बताई। उनका कहना है कि अगर एक ही तरह की चोट लगातार सामने आ रही है तो उसके पीछे ट्रेनिंग पैटर्न, अभ्यास के तरीकों और वर्कलोड मैनेजमेंट की भूमिका की समीक्षा होनी चाहिए।

उन्होंने कहा कि जसप्रीत बुमराह घुटने की चोट से जूझ रहे हैं, लेकिन कई अन्य खिलाड़ियों में हैमस्ट्रिंग की समस्या दिखाई दे रही है। ऐसे में यह पता लगाना जरूरी है कि खिलाड़ियों की ट्रेनिंग में कहीं कोई कमी तो नहीं रह रही।

हालांकि, गावस्कर ने बीसीसीआई के सेंटर ऑफ एक्सीलेंस के फिजियो और मेडिकल स्टाफ को सीधे तौर पर जिम्मेदार ठहराने से इनकार किया। उनका कहना है कि कई चोटें राष्ट्रीय टीम के साथ खेलते समय लगती हैं और बाद में सेंटर ऑफ एक्सीलेंस पर सवाल उठाए जाते हैं।

गावस्कर ने गेंदबाजों के वर्कलोड मैनेजमेंट पर भी सवाल उठाया। उन्होंने नेट्स में गेंदबाजी की सीमित संख्या पर सवाल करते हुए कहा कि जब टी20 मुकाबले में गेंदबाज को चार ओवर में 24 गेंदें डालनी होती हैं, तो अभ्यास में उससे कम गेंदें डालना मैच की तैयारी के लिए कितना प्रभावी है, इस पर विचार होना चाहिए।

अब नजर इस बात पर है कि बीसीसीआई गावस्कर की चिंताओं को किस तरह देखता है।

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