गुवाहाटी, 16 अगस्त। असम में बाढ़ की स्थिति में धीरे-धीरे सुधार हो रहा है। राज्य में अब बाढ़ का प्रभाव पांच जिलों तक सीमित रह गया है। सभी प्रमुख नदियां खतरे के निशान से नीचे बह रही हैं, लेकिन हजारों लोगों के सामने अब भी राहत और पुनर्वास की चुनौती बनी हुई है। प्रभावित इलाकों में लोग सामान्य जनजीवन बहाल करने की कोशिश कर रहे हैं, जबकि प्रशासन जरूरी सेवाओं को दोबारा पटरी पर लाने में जुटा है।
असम राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (ASDMA) की 15 अगस्त की रिपोर्ट के अनुसार, बाढ़ से गोलाघाट, होजाई, नगांव, शिवसागर और जोरहाट जिले प्रभावित हैं। इन पांच जिलों के 16 राजस्व मंडलों के कुल 235 गांव अभी भी बाढ़ की चपेट में हैं। राज्य में कुल 62,443 लोग प्रभावित बताए गए हैं। इसके अलावा 4,954.43 हेक्टेयर कृषि भूमि अब भी पानी में डूबी हुई है, जिससे किसानों के सामने फसल और आजीविका को लेकर बड़ी चिंता खड़ी हो गई है।
बाढ़ से सबसे ज्यादा नुकसान शिवसागर जिले में बताया गया है। हालांकि जलस्तर में कमी आने के बाद स्थिति पहले की तुलना में बेहतर हुई है। प्रशासन का मुख्य जोर प्रभावित क्षेत्रों में आवश्यक सेवाओं को बहाल करने पर है। खासकर स्कूलों को फिर से सामान्य स्थिति में लाने के लिए जरूरी कदम उठाए जा रहे हैं, ताकि बच्चों की पढ़ाई जल्द शुरू हो सके।
सरकार ने प्रभावित लोगों के लिए राहत व्यवस्था अभी भी जारी रखी है। राज्य में 28 राहत शिविर और नौ राहत वितरण केंद्र समेत कुल 37 केंद्र संचालित हैं। राहत शिविरों में 4,877 लोग शरण लिए हुए हैं, जबकि राहत वितरण केंद्रों के माध्यम से 5,892 ऐसे प्रभावित लोगों को सहायता दी जा रही है, जो शिविरों में नहीं रह रहे हैं।
बाढ़ के दौरान राहत एवं बचाव कार्य में एसडीआरएफ, डीडीआरएफ, पुलिस और अग्निशमन विभाग समेत विभिन्न एजेंसियां लगातार सक्रिय हैं। दूसरी ओर, बाढ़ के कारण कई स्थानों पर सड़क, पुल और अन्य बुनियादी ढांचे को नुकसान पहुंचा है। राज्य में बाढ़ से अब तक 105 लोगों की मौत की सूचना है। ऐसे में पानी उतरने के बावजूद प्रभावित इलाकों में पुनर्निर्माण और जनजीवन को पूरी तरह सामान्य करना प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती बना हुआ है।