उत्तराखंड में लगातार हो रही मूसलाधार बारिश ने जनजीवन को गंभीर रूप से प्रभावित कर दिया है। कई जिलों में नदियां खतरे और चेतावनी स्तर तक पहुंच गई हैं, जबकि भूस्खलन और मलबा आने से बदरीनाथ, गंगोत्री और यमुनोत्री समेत कई प्रमुख राष्ट्रीय राजमार्ग बाधित हो गए हैं। मौसम विभाग ने अगले 24 घंटों के लिए देहरादून, बागेश्वर और पिथौरागढ़ में भारी से बहुत भारी बारिश का अलर्ट जारी किया है। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सभी आपदा प्रबंधन एजेंसियों को हाई अलर्ट पर रहने और राहत-बचाव कार्यों के लिए पूरी तरह तैयार रहने के निर्देश दिए हैं।
बुधवार देर रात से शुरू हुई तेज बारिश गुरुवार सुबह तक जारी रही। राजधानी देहरादून सहित अधिकांश जिलों में लगातार वर्षा होने से तापमान में गिरावट दर्ज की गई और पहाड़ी क्षेत्रों में भूस्खलन का खतरा बढ़ गया। प्रशासन ने लोगों से अनावश्यक यात्रा न करने और नदी-नालों से दूर रहने की अपील की है।
रुद्रप्रयाग में अलकनंदा और मंदाकिनी नदियां खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं। वहीं देवप्रयाग में भागीरथी नदी चेतावनी स्तर पर पहुंच गई है। हरिद्वार के रायसी क्षेत्र में बाणगंगा नदी का जलस्तर भी चेतावनी सीमा से ऊपर दर्ज किया गया। जिला प्रशासन लगातार नदी किनारे रहने वाले लोगों को लाउडस्पीकर के माध्यम से सतर्क रहने की चेतावनी दे रहा है।
बारिश के कारण ऋषिकेश-यमुनोत्री, ऋषिकेश-बदरीनाथ, गंगोत्री, कर्णप्रयाग-थराली-ग्वालदम और धारचूला-तवाघाट सहित कई प्रमुख मार्गों पर मलबा आने से यातायात प्रभावित हुआ है। हालांकि ऋषिकेश-केदारनाथ और एनएच-119 के कुछ हिस्सों पर मलबा हटाकर यातायात बहाल कर दिया गया है। कई अन्य मार्गों को खोलने के लिए मशीनें लगाई गई हैं।
इस बीच आसन नदी में जलप्रवाह बढ़ने से ढालीपुर स्थित आसन बैराज के गेट खोलकर यमुना नदी में करीब 39 हजार क्यूसेक पानी छोड़ा गया। प्रशासन ने यमुना के किनारे और निचले इलाकों में रहने वाले लोगों से सतर्क रहने और नदी के पास नहीं जाने की अपील की है। देहरादून जिले में सुबह आठ बजे तक 32.8 मिमी बारिश दर्ज की गई, जबकि जिले की 14 सड़कें फिलहाल बंद हैं।