ईरान-अमेरिका तनाव में बड़ा मोड़! हमला रुका, लेकिन क्यों नहीं थम रहा संकट?

तेहरान/वाशिंगटन। पश्चिम एशिया में कई महीनों से जारी तनाव के बीच हालात में कुछ नरमी के संकेत दिखाई दिए हैं। ईरान और ओमान के बीच होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर चल रही राजनयिक बातचीत में सकारात्मक प्रगति हुई है। इसी बीच अमेरिकी सेना ने ईरान पर लगातार 13 दिनों तक जारी सैन्य कार्रवाई के बाद फिलहाल हमले रोक दिए हैं। हालांकि, क्षेत्र में हूती विद्रोहियों की गतिविधियां और समुद्री सुरक्षा को लेकर तनाव अब भी बना हुआ है।

अंतरराष्ट्रीय मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, ओमान के अधिकारियों ने तेहरान पहुंचकर ईरानी नेतृत्व के साथ समुद्री मार्गों और होर्मुज जलडमरूमध्य में नौवहन व्यवस्था को लेकर बातचीत की। दोनों देशों के बीच वार्ता को सकारात्मक बताया जा रहा है, हालांकि अंतिम समझौते तक पहुंचने में अभी समय लग सकता है। बताया जा रहा है कि अमेरिका और ईरान भी प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से तनाव कम करने के विकल्पों पर विचार कर रहे हैं।

इस बीच अमेरिका ने आधिकारिक तौर पर हमले रोकने की पुष्टि नहीं की है, लेकिन अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के निर्देश के बाद सैन्य कार्रवाई में विराम आया है। दूसरी ओर, अमेरिकी मध्य कमान (सेंटकॉम) ने ईरान की ओर जाने वाले कुछ टैंकरों की समुद्र में जांच जारी रखने की जानकारी दी है। अमेरिका का कहना है कि क्षेत्र में समुद्री निगरानी और सुरक्षा अभियान पहले की तरह जारी रहेंगे।

तनाव का एक नया मोर्चा यूक्रेन और ईरान के बीच भी खुल गया है। कैस्पियन सागर में एक ईरानी जहाज पर हुए हमले के बाद तेहरान ने यूक्रेन के राजनयिकों को तलब कर कड़ा विरोध दर्ज कराया है। ईरान ने इस घटना को अंतरराष्ट्रीय कानून और संयुक्त राष्ट्र चार्टर का उल्लंघन बताया है। वहीं यूक्रेन का दावा है कि उसने रूस से जुड़े जहाजों को निशाना बनाया था, जिनसे कथित तौर पर ईरान को सैन्य सामग्री भेजी जा रही थी।

उधर, यमन के हूती विद्रोहियों ने सऊदी अरब के तेल प्रतिष्ठानों पर मिसाइल और ड्रोन हमले कर क्षेत्रीय तनाव को और बढ़ा दिया है। इन घटनाओं के बीच पश्चिम एशिया की स्थिति पर पूरी दुनिया की नजर बनी हुई है, क्योंकि किसी भी नए घटनाक्रम का असर वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति और समुद्री व्यापार पर पड़ सकता है।

 

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