कोलकाता/नई दिल्ली। संसद के मानसून सत्र और राजधानी दिल्ली में लगातार हो रहे विरोध-प्रदर्शनों के बीच केंद्र सरकार ने सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत करने के लिए बड़ा कदम उठाया है। केंद्रीय गृह मंत्रालय ने पश्चिम बंगाल में तैनात केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) की 20 अतिरिक्त कंपनियों को तत्काल दिल्ली भेजने का निर्णय लिया है। जवानों को एयरलिफ्ट कर राजधानी पहुंचाया जा रहा है, जबकि बख्तरबंद वाहनों को सड़क मार्ग से रवाना किया गया है।
अधिकारियों के अनुसार, गृह मंत्रालय ने 21 जुलाई की रात इस संबंध में आदेश जारी किया था। इसके बाद गुरुवार रात को कोलकाता से विशेष व्यवस्था के तहत सीआरपीएफ के जवानों को दिल्ली के लिए रवाना किया गया। इन अतिरिक्त कंपनियों की तैनाती राजधानी के संवेदनशील इलाकों में कानून-व्यवस्था बनाए रखने, भीड़ नियंत्रण और किसी भी आपात स्थिति से निपटने के उद्देश्य से की जाएगी।
बताया जा रहा है कि हाल के दिनों में दिल्ली में विभिन्न संगठनों और राजनीतिक दलों के विरोध-प्रदर्शनों के दौरान तनावपूर्ण स्थिति बनी रही। साथ ही संसद का मानसून सत्र भी जारी है, जिसके चलते सुरक्षा एजेंसियां किसी भी संभावित चुनौती से निपटने के लिए अतिरिक्त सतर्कता बरत रही हैं। इन्हीं परिस्थितियों को देखते हुए केंद्र ने पश्चिम बंगाल से अतिरिक्त केंद्रीय बल बुलाने का फैसला किया।
जानकारी के मुताबिक, जिन 20 कंपनियों को दिल्ली भेजा गया है, वे पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के दौरान वहां तैनात की गई थीं। चुनाव समाप्त होने के बाद राज्य सरकार के अनुरोध पर उन्हें वहीं रखा गया था। सीआरपीएफ की एक कंपनी में औसतन 100 जवान होते हैं। ऐसे में करीब दो हजार अतिरिक्त जवान अब दिल्ली की सुरक्षा व्यवस्था का हिस्सा बनेंगे।
अधिकारियों ने बताया कि पहले से ही सीआरपीएफ और उसकी विशेष दंगा-रोधी इकाई रैपिड एक्शन फोर्स (रैफ) की लगभग 30 कंपनियां दिल्ली पुलिस के साथ मिलकर सुरक्षा व्यवस्था संभाल रही हैं। नई कंपनियों के आने के बाद राजधानी में केंद्रीय सुरक्षा बलों की मौजूदगी और मजबूत होगी। सुरक्षा एजेंसियों का मानना है कि इससे कानून-व्यवस्था बनाए रखने और किसी भी अप्रिय स्थिति से प्रभावी ढंग से निपटने में मदद मिलेगी।