आगामी कांवड़ यात्रा को सुरक्षित और व्यवस्थित ढंग से संपन्न कराने के लिए आयोजित अंतर्राज्यीय समन्वय बैठक में कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए। सबसे बड़ा फैसला यह रहा कि दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे पर कांवड़ यात्रा का संचालन नहीं होगा। इस व्यवस्था को प्रभावी ढंग से लागू करने की जिम्मेदारी दिल्ली और उत्तर प्रदेश प्रशासन को सौंपी गई है।
उत्तराखंड के मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन की अध्यक्षता में आयोजित बैठक में उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, दिल्ली, हरियाणा, राजस्थान, पंजाब और हिमाचल प्रदेश के प्रशासन एवं पुलिस अधिकारियों ने भाग लिया। इसके अलावा आईटीबीपी, सीआरपीएफ, एसएसबी, आरपीएफ, एनडीआरएफ, भारतीय रेलवे और अन्य केंद्रीय एजेंसियों के प्रतिनिधि भी मौजूद रहे।
मुख्य सचिव ने कहा कि कांवड़ यात्रा देश के सबसे बड़े धार्मिक आयोजनों में से एक है, जिसमें हर वर्ष करोड़ों श्रद्धालु हरिद्वार से गंगाजल लेकर अपने-अपने गंतव्य तक पहुंचते हैं। ऐसे में सभी राज्यों के बीच बेहतर समन्वय, रियल टाइम सूचना साझा करना, आधुनिक सर्विलांस सिस्टम और वैज्ञानिक भीड़ प्रबंधन यात्रा की सफलता के लिए बेहद जरूरी हैं।
बैठक में निर्णय लिया गया कि राज्य सीमाओं पर संयुक्त चेकपोस्ट और बैरियर स्थापित किए जाएंगे, जहां पड़ोसी राज्यों की पुलिस मिलकर सुरक्षा व्यवस्था संभालेगी। इसके साथ ही सोशल मीडिया पर विशेष निगरानी रखने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि अफवाहों और भ्रामक सूचनाओं का तत्काल खंडन किया जा सके। राज्यों के साइबर सेल और सोशल मीडिया इकाइयों के बीच भी समन्वय बढ़ाया जाएगा।
रेलवे अधिकारियों को कांवड़ यात्रा के दौरान विशेष ट्रेनों के संचालन और रेलवे स्टेशनों पर सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने के निर्देश दिए गए। वहीं स्वास्थ्य सेवाएं, पेयजल, स्वच्छता, यातायात प्रबंधन और आपदा प्रबंधन की तैयारियों की भी विस्तार से समीक्षा की गई।
जिलाधिकारी मयूर दीक्षित ने बताया कि 31 जुलाई से 4 अगस्त तक पंचक रहेगा। इसके बाद 5 अगस्त से कांवड़ियों की संख्या तेजी से बढ़ने की संभावना है, जबकि 8 अगस्त से शुरू होने वाला डाक कांवड़ चरण यात्रा का सबसे भीड़भाड़ वाला और चुनौतीपूर्ण दौर माना जा रहा है। प्रशासन ने सभी विभागों को समय रहते तैयारियां पूरी करने के निर्देश दिए हैं।