उत्तराखंड सरकार ने शिक्षकों के प्रशिक्षण को अधिक आधुनिक, प्रभावी और छात्र-केंद्रित बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। प्रदेश के शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने निर्देश दिए हैं कि राज्य के सभी जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थानों (डायट) में नवाचार आधारित प्रशिक्षण को प्राथमिकता दी जाए। साथ ही प्रत्येक डायट में शिक्षकों के लिए मानसिक स्वास्थ्य (मेंटल हेल्थ) से जुड़ी ट्रेनिंग को अनिवार्य बनाया जाएगा।
शनिवार को विद्यालयी शिक्षा महानिदेशालय स्थित समग्र शिक्षा सभागार में आयोजित राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (एससीईआरटी) और सभी डायट की समीक्षा बैठक में शिक्षा मंत्री ने अधिकारियों को प्रशिक्षण कार्यक्रमों में आधुनिक तकनीक और नवाचार को शामिल करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि पारंपरिक शिक्षण पद्धतियों के बजाय नई तकनीकों और रचनात्मक तरीकों को अपनाने से शिक्षक विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास में अधिक प्रभावी भूमिका निभा सकेंगे।
डॉ. रावत ने सभी डायट प्राचार्यों को नवाचार आधारित कार्यक्रमों की विस्तृत रूपरेखा तैयार करने को कहा। उन्होंने निर्देश दिए कि प्रशिक्षण कार्यशालाओं में नशामुक्ति, पर्यावरण संरक्षण, सोशल इमोशनल लर्निंग, नैतिक शिक्षा और मानसिक स्वास्थ्य जैसे विषयों पर विशेष सत्र आयोजित किए जाएं। उनका कहना था कि यदि शिक्षक बच्चों में तनाव और मानसिक समस्याओं के शुरुआती संकेत पहचान सकेंगे तो समय रहते उचित मार्गदर्शन और सहायता उपलब्ध कराई जा सकेगी।
शिक्षा मंत्री ने प्रशिक्षण कार्यक्रमों में पद्मश्री सम्मानित व्यक्तियों, साहित्यकारों, लेखकों, अभिभावकों और ग्राम प्रधानों की सहभागिता सुनिश्चित करने पर भी जोर दिया, ताकि शिक्षकों को समाज के विभिन्न क्षेत्रों के अनुभवों से सीखने का अवसर मिल सके।
बैठक में डॉ. रावत ने डायट संस्थानों को शैक्षणिक उत्कृष्टता केंद्र के रूप में विकसित करने के निर्देश भी दिए। उन्होंने बताया कि विभिन्न डायट को सामाजिक विज्ञान, राजनीति विज्ञान, अंग्रेजी, मनोविज्ञान, विज्ञान और शैक्षिक तकनीक जैसे विषयों की जिम्मेदारी सौंपी गई है। साथ ही वित्तीय वर्ष 2023-24 और 2025-26 में स्वीकृत मॉडल डायट भवनों के निर्माण कार्य तीन माह के भीतर पूरे करने के निर्देश दिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि विकास कार्यों में किसी भी प्रकार की लापरवाही या देरी स्वीकार नहीं की जाएगी।