विदेशों में ‘असमय’ रथयात्रा पर उठा विवाद, गजपति महाराजा ने राष्ट्रपति-प्रधानमंत्री से की बड़ी अपील

भुवनेश्वर। भगवान जगन्नाथ की रथयात्रा और स्नान यात्रा को लेकर एक बार फिर विवाद गहरा गया है। पुरी के गजपति महाराजा एवं श्रीजगन्नाथ मंदिर के पारंपरिक प्रथम सेवक दिव्यसिंह देव ने विदेशों में अंतरराष्ट्रीय कृष्ण भावनामृत संघ (इस्कॉन) द्वारा पारंपरिक तिथियों से अलग समय पर रथयात्रा और स्नान यात्रा आयोजित किए जाने पर गंभीर आपत्ति जताई है। उन्होंने इस मामले में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर हस्तक्षेप करने तथा भगवान जगन्नाथ की धार्मिक परंपराओं की रक्षा के लिए आवश्यक कदम उठाने की मांग की है।

चार जुलाई 2026 को भेजे गए पत्र में गजपति महाराजा ने कहा कि विदेशों में कई स्थानों पर भगवान जगन्नाथ से जुड़े प्रमुख धार्मिक उत्सव शास्त्रोक्त तिथियों के बजाय अलग समय पर आयोजित किए जा रहे हैं। उनका कहना है कि इससे सनातन वैदिक परंपरा और श्रीजगन्नाथ संप्रदाय की स्थापित धार्मिक मान्यताओं पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है। साथ ही भारत और विदेशों में रहने वाले करोड़ों श्रद्धालुओं, विशेषकर ओड़िया समाज की धार्मिक भावनाएं भी आहत हो रही हैं।

उन्होंने पत्र में यह भी उल्लेख किया कि इस मुद्दे को वह पहले भी केंद्र सरकार के समक्ष उठा चुके हैं। अक्टूबर 2025 में प्रधानमंत्री और अप्रैल 2026 में राष्ट्रपति को भेजे गए पत्रों में भी उन्होंने यही चिंता व्यक्त की थी। इस बार उन्होंने उन देशों की सूची भी संलग्न की है, जहां पारंपरिक तिथियों से अलग रथयात्रा और स्नान यात्रा आयोजित की गई है या प्रस्तावित है।

गजपति महाराजा का कहना है कि भगवान जगन्नाथ की स्नान यात्रा, रथयात्रा और अन्य प्रमुख अनुष्ठानों की तिथियां शास्त्रों और प्राचीन परंपराओं के अनुसार निर्धारित हैं। विभिन्न शंकराचार्यों और वैष्णवाचार्यों ने भी समय-समय पर इन्हें निर्धारित तिथियों पर ही आयोजित किए जाने का समर्थन किया है, ताकि इनकी आध्यात्मिक गरिमा और धार्मिक पवित्रता बनी रहे।

उन्होंने राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री से आग्रह किया है कि संबंधित पक्षों से संवाद कर इस विषय का समाधान निकाला जाए और यह सुनिश्चित किया जाए कि भगवान जगन्नाथ से जुड़े सभी प्रमुख धार्मिक आयोजन शास्त्रोक्त तिथियों और परंपरागत विधि-विधान के अनुसार ही संपन्न हों। उनका कहना है कि यह केवल ओडिशा का नहीं, बल्कि दुनिया भर में भगवान जगन्नाथ के करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था और सनातन परंपरा से जुड़ा महत्वपूर्ण विषय है।

 

Leave A Reply

Your email address will not be published.