तमिलनाडु में ‘Golden’ सियासत, CM Vijay का ‘मामा’ कार्ड
रिश्तों की नई सियासी इबारत सोना,: तमिलनाडु के सीएम विजय ने सरकारी अस्पतालों में जन्मे हर नवजात को सोने की अंगूठी देने की योजना को मंजूरी देकर नया सांस्कृतिक व राजनीतिक इतिहास रचा है…
-ममता सिंह
नई दिल्ली/चेन्नई। तमिलनाडु की सत्ता में ऐतिहासिक बदलाव के बाद नवनिर्वाचित मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय (थलपति विजय) ने अपनी ‘तमिलगा वेट्री कझगम’ (TVK) सरकार का सबसे चर्चित और लोक-लुभावन चुनावी वादा जमीन पर उतार दिया है। राज्य सरकार ने सरकारी अस्पतालों में जन्म लेने वाले हर नवजात शिशु को एक ग्राम सोने की अंगूठी उपहार में देने वाली महत्वाकांक्षी ‘थाईमामन थंगा मोथिरम थिट्टम’ (Maternal Uncle’s Gold Ring Scheme) योजना को आधिकारिक मंजूरी दे दी है। यह केवल एक कल्याणकारी घोषणा नहीं है, बल्कि इसके पीछे गहरे सांस्कृतिक और रणनीतिक मायने छिपे हैं। तमिल समाज में बच्चे के जन्म पर ‘थाईमामन सीर’ यानी सगे मामा द्वारा सोने का उपहार देने की बेहद पवित्र और अनिवार्य परंपरा रही है। मुख्यमंत्री विजय ने इसी लोक-परंपरा को शासकीय नीति में बदलकर खुद को राज्य के हर नवजात के ‘मामा’ के रूप में स्थापित कर लिया है, जो सीधे आम जनता के दिलों से जुड़ने का एक बेहद स्मार्ट राजनीतिक दांव है।
सालाना लगभग 755.83 करोड़ रुपये के भारी-भरकम बजट वाली इस योजना को प्रशासनिक रूप से बेहद मजबूत और पारदर्शी बनाया गया है। यद्यपि मुख्यमंत्री विजय आगामी 15 सितंबर को द्रविड़ राजनीति के प्रतीक और पूर्व मुख्यमंत्री सी.एन. अन्नादुरई की जयंती पर इस योजना की औपचारिक शुरुआत करेंगे, लेकिन इसका लाभ 22 जून से ही पैदा हुए बच्चों को मिलेगा, जो संयोगवश मुख्यमंत्री विजय का जन्मदिन भी है। सरकार के इस कदम को सिर्फ मुफ्त रेवड़ियां बांटने के नजरिए से देखना एक भूल होगी। दरअसल, इसके पीछे एक बड़ा सामाजिक और स्वास्थ्य संबंधी लक्ष्य छिपा है। तमिलनाडु में हर साल करीब 7.8 लाख प्रसव होते हैं, जिनमें से लगभग 53 प्रतिशत (4.2 लाख) सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों में होते हैं। इस योजना का सीधा लाभ बिना किसी लिंग-भेद (चाहे लड़का हो या लड़की) और बिना किसी ‘बर्थ ऑर्डर’ (पहले या बाद के बच्चे) के प्रतिबंध के सभी को मिलेगा, बशर्ते परिवार तमिलनाडु का स्थायी निवासी हो।
विश्लेषणात्मक दृष्टिकोण से देखें तो यह योजना राज्य की सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रणाली को एक नया गौरव प्रदान करेगी। आमतौर पर सरकारी अस्पतालों को मजबूरी का विकल्प माना जाता है, लेकिन जन्म के समय ही नवजात को लगभग 13,600 रुपये मूल्य की सोने की अंगूठी (वर्तमान दरों के अनुसार) देकर सरकार इन केंद्रों को आत्मसम्मान और उत्सव के केंद्र में बदल रही है। इससे न केवल संस्थागत प्रसव (Institutional Deliveries) को और बढ़ावा मिलेगा, बल्कि निजी अस्पतालों के भारी-भरकम खर्च से दबे गरीब परिवारों को एक बड़ा आर्थिक संबल भी मिलेगा।
राजनीतिक मोर्चे पर, विपक्ष इसे ‘सिनेमैटिक स्टाइल’ और बजट पर अतिरिक्त बोझ बताकर इसकी आलोचना कर रहा है, लेकिन मुख्यमंत्री विजय ने विधानसभा में स्पष्ट कर दिया है कि उनकी सरकार ‘रील’ से निकलकर ‘रियल’ में आम जनता के कल्याण के लिए प्रतिबद्ध है। कड़े सुरक्षा इंतजामों, समर्पित जिला लॉजिस्टिक्स प्रबंधकों और चिकित्सा महाविद्यालयों के प्राचार्यों की देखरेख में लॉकर सर्विलांस के जरिए बांटी जाने वाली ये अंगूठियां सीधे तौर पर जमीन से जुड़े मतदाताओं, विशेषकर महिलाओं को पार्टी के प्रति वफादार बनाने का काम करेंगी। सांस्कृतिक प्रतीकों का ऐसा सटीक इस्तेमाल करके मुख्यमंत्री विजय ने द्रविड़ राजनीति के स्थापित गढ़ में अपनी जड़ों को बहुत कम समय में बेहद गहरा और मजबूत कर लिया है।