शोक में डूबा उत्तराखंड: देहरादून में Jaspal Rana के पार्थिव शरीर को दी गई अंतिम विदाई

-ममता सिंह, देहरादून।

देश के खेल इतिहास में अचूक निशानेबाजी और स्वर्णिम सफलताओं का नया अध्याय लिखने वाले प्रख्यात अंतरराष्ट्रीय शूटर जसपाल राणा (50) का आकस्मिक निधन हो गया। आज देहरादून स्थित उनके आवास पर पार्थिव शरीर को अंतिम दर्शन के लिए रखा गया, जहाँ खेल प्रेमियों, राजनेताओं और आम जनता ने नम आंखों से अपने इस लाडले खिलाड़ी को विदाई दी। अंतिम दर्शन के बाद उनके पार्थिव शरीर को अंतिम संस्कार के लिए पवित्र नगरी वाराणसी ले जाया जा रहा है। मूल रूप से उत्तरकाशी में जन्मे और मसूरी तथा दिल्ली में शिक्षित हुए जसपाल के पिता नारायण सिंह राणा पूर्व खेल राज्य मंत्री रहे हैं। जसपाल का जाना न केवल उत्तराखंड बल्कि पूरे भारतीय खेल जगत के लिए एक अपूरणीय क्षति है।

अपूरणीय क्षति: मुख्यमंत्री धामी ने जसपाल राणा के परिजनों से मुलाकात कर ढांढस बंधाया; कहा- उत्तराखंड ने अपना एक महान सपूत और खेल मार्गदर्शक खो दिया...| Pic Credit : Pushkar Singh Dhami/FB
अपूरणीय क्षति: मुख्यमंत्री धामी ने जसपाल राणा के परिजनों से मुलाकात कर ढांढस बंधाया; कहा- उत्तराखंड ने अपना एक महान सपूत और खेल मार्गदर्शक खो दिया…| Pic Credit : Pushkar Singh Dhami/FB

जसपाल राणा का जीवन केवल पदकों तक सीमित नहीं था, बल्कि वह देश में खेल संस्कृति को जमीनी स्तर पर मजबूत करने के पैरोकार थे। उनका सबसे बड़ा योगदान वर्ष 2012 के बाद एक कड़क और समर्पित कोच के रूप में उभरना था। उन्होंने देहरादून की शूटिंग रेंज में आर्थिक रूप से कमजोर और गरीब तबके के बच्चों को निशुल्क प्रशिक्षण देना शुरू किया, जो खेल जगत में उनके परोपकारी और संवेदनशील स्वभाव को दर्शाता है। वह मानते थे कि प्रतिभा कभी पैसे की मोहताज नहीं होनी चाहिए।

गुरु को अंतिम प्रणाम: अपनी सफलता के सूत्रधार और कोच जसपाल राणा के अंतिम दर्शन कर फफक पड़ीं स्टार शूटर मनु भाकर...| Pic Credit : Pushkar Singh Dhami/FB
गुरु को अंतिम प्रणाम: अपनी सफलता के सूत्रधार और कोच जसपाल राणा के अंतिम दर्शन कर फफक पड़ीं स्टार शूटर मनु भाकर…| Pic Credit : PTI/FB

जसपाल राणा ने अपने पीछे एक समृद्ध खेल विरासत छोड़ी है। उनका पूरा परिवार भारतीय शूटिंग को समर्पित रहा है। उनके छोटे भाई सुभाष राणा और बहन सुषमा राणा (जो केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के परिवार की बहू हैं) ने भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश का मान बढ़ाया है। यही नहीं, उनकी बेटी देवांशी राणा विश्व कप चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक जीत चुकी हैं और बेटा युवराज भी इसी राह पर है। उनके पैतृक गांव टटोर नैनबाग चिलामू से लेकर देश-विदेश के खेल गलियारों में पसरा सन्नाटा यह बताने के लिए काफी है कि जसपाल ने खेल और समाज पर कितनी गहरी छाप छोड़ी थी। धनोल्टी विधायक प्रीतम सिंह पंवार, भाजपा-कांग्रेस के जिलाध्यक्षों सहित तमाम गणमान्य लोगों ने उनके निधन को भारतीय खेल के एक सुनहरे युग का अंत बताया है। एक खिलाड़ी, मार्गदर्शक और समाज सेवक के रूप में जसपाल राणा हमेशा याद किए जाएंगे।

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