TMC मेयर के ठिकानों पर रेड से हिला Bengal: खेत से बोरियों में मिला 2.24 करोड़ कैश और सोना, गिरफ्तार

भ्रष्टाचार का 'ग्राउंड' रियलिटी: आरोपी 6 दिन की रिमांड पर, सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस (TMC) की मुश्किलें बढ़ीं...

चाणक्य मंत्र ब्यूरो

कोलकाता। पश्चिम बंगाल की राजनीति में भ्रष्टाचार का जिन्न एक बार फिर जूट के खेतों से बाहर निकल आया है, जिसने सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस (TMC) की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। उत्तर 24 परगना के बदुरिया नगरपालिका के अध्यक्ष दीपांकर भट्टाचार्य की गिरफ्तारी और उनके ठिकानों से हुई बेहिसाब बरामदगी ने राज्य के प्रशासनिक तंत्र में गहरे तक पैठे सिंडिकेट राज को उजागर किया है। एक गुप्त सूचना के आधार पर होटल से शुरू हुई यह जांच जब दीपांकर के जूट के खेतों तक पहुंची, तो मिट्टी के नीचे दबी पांच बोरियों से 2.24 करोड़ रुपये नकद और भारी मात्रा में सोना बरामद हुआ। विश्लेषणात्मक नजरिए से देखें तो यह घटना पश्चिम बंगाल में काले धन को खपाने और उसे छुपाने के बदलते पैंतरे को दर्शाती है। केंद्रीय एजेंसियों की लगातार हो रही छापेमारी के डर से अब भ्रष्ट राजनेता बैंकों या लॉकरों के बजाय ग्रामीण अंचलों और खेतों को ‘सेफ हाउस’ की तरह इस्तेमाल कर रहे हैं।

इस पूरे मामले का सबसे स्याह और संवेदनशील पहलू नकदी के साथ-साथ आपदा राहत के लिए भेजी गई 4,000 सरकारी तिरपालों (Tarpaulins) की जब्ती है। यह सीधे तौर पर चक्रवात और प्राकृतिक आपदाओं से जूझने वाले गरीब तबके के अधिकारों पर डाका डालने जैसा है, जो इस भ्रष्टाचार को महज वित्तीय धोखाधड़ी से ऊपर उठाकर एक अमानवीय कृत्य की श्रेणी में खड़ा करता है। राजनीतिक रूप से देखें तो लोकसभा चुनाव के नतीजों के बाद राज्य में बने नए समीकरणों के बीच यह खुलासा ममता बनर्जी सरकार के ‘ईमानदार छवि’ के दावों पर करारा प्रहार है। विपक्ष को इस घटना से सत्तारूढ़ दल को घेरने का एक और बड़ा और अकाट्य मुद्दा मिल गया है। कोर्ट द्वारा आरोपी चेयरमैन को छह दिनों की पुलिस हिरासत में भेजे जाने के बाद अब जांच का मुख्य फोकस इस बात पर है कि इस सिंडिकेट के तार कोलकाता के किन बड़े नीति-नियंताओं से जुड़े हैं। साफ है कि आने वाले दिनों में यह आंच बदुरिया की सीमाओं को लांघकर राज्य के कई अन्य रसूखदार चेहरों को अपनी जद में ले सकती है।

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